मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के ऐतिहासिक गांव सोरम में 15 साल बाद सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत का आयोजन किया जा रहा है। 16 से 18 नवंबर तक चलने वाली इस तीन दिवसीय पंचायत का उद्देश्य समाज की विभिन्न कुरीतियों को समाप्त करना और पारंपरिक मूल्यों को सशक्त करना है।
इस पंचायत में देशभर की 36 बिरादरियों के खाप चौधरी और थंबेदार शामिल हो रहे हैं। अंतिम दिन इन चर्चाओं के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। पंचायत में शादी-विवाह में फिजूलखर्ची पर रोक, मृत्यु भोज पर पाबंदी, कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, नशाखोरी, पारिवारिक विघटन और आपसी झगड़े रोकने जैसे कई मुद्दों पर प्रस्ताव रखे गए हैं।
विशेष रूप से, युवाओं में मोबाइल और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को एक गंभीर समस्या माना गया है। इसके लिए कठोर दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। महिलाओं द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अशोभनीय सामग्री पोस्ट करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी प्रमुखता से आया है।
पंचायत के दूसरे दिन सोमवार को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर से बड़ी संख्या में लोग सोरम पहुंचे। मंच पर जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और उत्तर प्रदेश सरकार में कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल उपस्थित थे।
बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने सभी विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया। इस अवसर पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि खाप चौधरियों द्वारा लिए गए सामाजिक सुधार संबंधी फैसले हमेशा समाज के हित में रहे हैं और सरकार भी ऐसे सकारात्मक कदमों का समर्थन करती है।
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी ने पंचायत को “अनेकता में एकता” का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई नहीं, बल्कि एकजुट सर्वजातीय समाज की सरदारी बैठी है। उन्होंने सभी को जम्मू-कश्मीर आने का निमंत्रण देते हुए स्पष्ट किया कि कश्मीर अब पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसके बारे में गलत धारणाएं केवल कुछ मीडिया रिपोर्टों का परिणाम हैं।
सर्वखाप मंत्री सुभाष बालियान ने बताया कि सामाजिक कुरीतियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इस सम्मेलन की तैयारी दो वर्षों से चल रही थी। उन्होंने कहा कि नशाखोरी, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, लिव-इन रिलेशनशिप और मोबाइल के गलत उपयोग जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंतन किया जा रहा है।
सभी खाप चौधरी अपने सुझाव दे चुके हैं और अंतिम दिन सामूहिक रूप से निर्णय लिए जाएंगे, जिन्हें सभी खापों द्वारा मान्यता दी जाएगी। सोरम गांव इस समय सर्वखाप का महाकुंभ बना हुआ है, जहां से कल समाज सुधार के लिए महत्वपूर्ण संदेश और दिशा पूरे देश में जाएगी।