अर्धकुंभ से पहले बड़ी खुशखबरी! 4 लेन होगा हरिद्वार-मुजफ्फरनगर मार्ग

2027 में हरिद्वार में लगने वाला अर्धकुंभ से पहले केंद्र सरकार ने हरिद्वार और मुजफ्फरनगर के बीच सफर करने वालों को बड़ी सौगात दी है. केंद्र ने हरिद्वार से पुरकाजी (मुजफ्फरनगर) को जोड़ने वाले नेशनल हाइवे-334ए को फोरलेन में बदलने की स्वीकृति दे दी है.

हरिद्वार अर्धकुंभ के इंफ्रास्ट्रक्चर में बेहद अहम

हरिद्वार अर्धकुंभ से पहले यह फोरलेन प्रोजेक्ट हरिद्वार की यातायात व्यवस्था को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने में काफी अहम माना जा रहा है. फाइनल अलाइनमेंट के तहत इस हाईवे को आधुनिक मानकों के हिसाब से ही विकसित किया जाएगा.

कई राज्यों के लोगों को मिलेगी राहत
हरिद्वार कुंभ और अर्धकुंभ में उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली एनसीआर और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. हरिद्वार उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र है इसलिए आम दिनों में भी यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. नतीजतन हरिद्वार -पुरकाजी मार्ग पर भारी ट्रैफिक के चलते जाम और दुर्घटनाओं की भी समस्या है.

कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा

जानकारी के मुताबिक हरिद्वार- पुरकाजी मार्ग को 4 लेन मार्ग में तब्दील करने के साथ कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा. अर्धकुंभ और कुंभ के दौरान भारी ट्रैफिक को देखते हुए रूट भी डायवर्ट किये जाते हैं ऐसे में हरिद्वार- पुरकाजी मार्ग ट्रैफिक प्रबंधन में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा.

हरिद्वार- पुरकाजी चौड़ीकरण का पूरा प्लान

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मार्ग का 47 किमी हिस्सा उत्तराखंड में और बाकी 13 किमी का हिस्सा यूपी में बनेगा.यह फोरलेन रोड हरिद्वार बाईपास से कनेक्ट होगा और हरिद्वार में सिंहद्वार से लक्सर होते हुए खानपुर के रास्ते पुरकाजी तक पहुंचेगा. अभी यह मार्ग केवल दो लेन का ही है. और केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद डीपीआर पर काम शुरू कर दिया गया है.

ट्रैफिक के साथ औद्योग और पर्यटन को भी रफ्तार

इस फोरलेन रोड के निर्माण से हरिद्वार-रुड़की औद्योगिक क्षेत्र को यूपी के बाजारों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, इससे लाजिस्टिक्स लागत घटेगी, नए वेयरहाउस और सर्विस सेक्टर विकसित होंगे. औद्योग और बाजार में कनेक्टिविटी से स्थानीय युवाओं को रोजगार के भी नए अवसर मिलेंगे. इसके साथ ही नीलकंठ, ऋषिकेश, गंगा घाट, कांवड़ मार्ग और दूसरे धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से धार्मिक पर्यटन को भी उन्नति मिलेगी.