मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश में अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ किस कदर बैठ गया है, इसकी एक बानगी सोमवार को मुजफ्फरनगर एसएसपी कार्यालय में देखने को मिली. गले में अपने नाम की तख्ती लटकाए और हाथों में सरेंडर की अर्जी लिए एक शख्स जब अधिकारियों के सामने पहुंचा, तो वहां मौजूद हर कोई दंग रह गया. यह शख्स कोई और नहीं, बल्कि प्रतिबंधित नीलगाय का शिकार करने वाला आरोपी भगवान दास था. पुलिस की लगातार दबिश और गिरफ्तारी के डर से आरोपी ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया और अपनी सफाई में एक दिलचस्प कहानी भी सुनाई.
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत बीती 22 फरवरी को हुई थी. वन विभाग को सूचना मिली थी कि ककरौली थाना क्षेत्र के जंगलों में कुछ शिकारी अवैध रूप से नीलगाय का शिकार करने पहुंचे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से जंगल की घेराबंदी की. पुलिस को आता देख शिकारी मौके पर अपनी सेंट्रो कार छोड़कर फरार हो गए. जब पुलिस ने मौके की तलाशी ली, तो वहां गोलियों से छलनी एक नीलगाय का शव बरामद हुआ. पुलिस ने कार को कब्जे में लेकर जांच शुरू की, तो पता चला कि यह कार भगवान दास नाम के व्यक्ति की है.
गले में तख्ती डालकर पहुंचा SSP दफ्तर
पुलिस पिछले कई दिनों से फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही थी. आरोपी भगवान दास के घर पर भी पुलिस ने दबिश दी थी. पुलिस की इस कार्रवाई से घबराकर आरोपी सोमवार को खुद ही सरेंडर करने पहुंच गया. उसने अपने गले में एक तख्ती लटका रखी थी, जिस पर उसका नाम लिखा था. उसने एसएसपी कार्यालय के अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर गुहार लगाई कि उसे गिरफ्तार कर लिया जाए.
‘दोस्त ने शराब पिलाई और फंसा दिया’
मीडिया से बातचीत के दौरान आरोपी भगवान दास ने अपनी बेगुनाही का दावा किया. उसने बताया कि आनंद सैनी नाम का एक लड़का उसके पास आया था. भगवान दास के मुताबिक, मुझे खाने-पीने (शराब) का शौक है. आनंद एक ‘हाफ’ (शराब की बोतल) लेकर आया और मुझे पिला दी. फिर कहने लगा कि चलो तुम्हें कहीं घुमा कर लाता हूं. उसने मेरी कार का फायदा उठाया और मुझे ककरौली के जंगल ले गया.
आरोपी ने आगे बताया कि जंगल में आनंद ने नीलगाय पर दो गोलियां चलाईं. जब नीलगाय मर गई, तो वह उसके टुकड़े करने लगा. भगवान दास का कहना है कि वह नशे में था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है. इसी बीच पुलिस पहुंच गई और दोनों अलग-अलग दिशाओं में भाग निकले.
रिटायर्ड रेलकर्मी का बेटा है आरोपी
भगवान दास ने बताया कि उसके पिता रेलवे से रिटायर हैं और वे मूल रूप से मुरादाबाद के रहने वाले हैं. वह साल 1984 में रुड़की शिफ्ट हुए थे. उसने कहा कि पुलिस उसके घर बार-बार जा रही थी, जिससे परेशान होकर उसने खुद को कानून के हवाले करना ही बेहतर समझा. उसने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी आनंद सैनी कभी खुद को मुजफ्फरनगर का बताता है तो कभी रुड़की का, और उसी ने उसे इस दलदल में फंसाया है.
वन विभाग की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम पर एसपी ग्रामीण आदित्य बंसल ने बताया कि ककरौली थाने में वन विभाग की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था. मौके से बरामद सेंट्रो कार के जरिए मालिक की पहचान भगवान दास के रूप में हुई थी. पुलिस उसे तलाश कर रही थी और पूछताछ के लिए नोटिस भेजने की तैयारी में थी. आज वह खुद कार्यालय पहुंचा है. पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके द्वारा बताए गए दूसरे आरोपी आनंद सैनी की तलाश में जुट गई है. पुलिस का कहना है कि तथ्यों की जांच के बाद सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.