कानपुर: अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में कानपुर पुलिस कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है. इसी वजह से लगातार हर दिशा में पुलिस जांच कर रही है. जिस पर भी संदेह हो रहा है, उसकी कुंडली खंगाली जा रही है. कानपुर पुलिस ने तीन फरार आरोपियों के खिलाफ 25-25 हजार का इनाम घोषित कर दिया है. डॉ रोहित, डॉ अफजाल और मुदस्सर अली के खिलाफ कानपुर पुलिस ने 25-25 हजार के इनाम घोषित किए हैं.
जब से यह मामला संज्ञान में आया है, तब से लगातार अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट सुर्खियों में है. वहीं जांच के दौरान पुलिस को अब एक व्हाट्सएप ग्रुप के बारे में जानकारी मिली. इस व्हाट्सएप ग्रुप में अंग ट्रांसप्लांट की डिटेल थी और तकरीबन 500 मोबाइल नंबर जुड़े हुए थे. ऐसे में इन 500 मोबाइल नंबर को कानपुर पुलिस खंगाल रही है. इस बारे में जेल में बंद आरोपी शिवम से भी पूछताछ की गई है.
आरोपी शिवम की जानकारी को किया जा रहा वेरीफाई
जो डिटेल आरोपी शिवम ने पुलिस को दिए हैं, उसको वेरीफाई किया जा रहा है. 2019 में कानपुर में इसी तरीके से अवैध अंग ट्रांसप्लांट कारोबार निकलकर सामने आया था. इसमें पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या 2019 का मामला और अभी के मामले कहीं से जुड़े हुए हैं. आरोपियों की गिरफ्तार करने के लिए कानपुर पुलिस लगातार पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में रेड भी कर रही है. पुलिस का दावा है कि जल्दी तीनों आरोपी उनके गिरफ्त में होंगे. वहीं दूसरी तरफ पुलिस तकरीबन 500 मोबाइल नंबर की जांच पड़ताल कर रही है. अभी तक इस मामले में 9 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.
40 से 50 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट
बता दें कि आमतौर पर किडनी ट्रांसप्लांट उन्हीं का होता है, जो रिश्तेदार होते हैं या फिर कोई किसी को देना चाहता है, तो उसे प्रॉपर तरीके से प्रशासन से अप्रूवल लेना पड़ता है. लेकिन कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, एंबुलेंस ड्राइवर शिवम ने कानपुर में 40 से 50 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट कराया. बताया जा रहा है कि यह सब अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रात के अंधेरे में किया गया. एंबुलेंस ड्राइवर शिवम डॉक्टर के संपर्क में रहता था.
जानकारी के मुताबिक, आरोपी डायलिसिस हो रहे मरीजों से संपर्क बनाता और फिर उन्हें डोनर लाकर देता था. करोड़ों रुपए में यह डील होती थी और डोनर को मात्र 4 से 6 लाख रुपए ही दिया करता था. एंबुलेंस ड्राइवर आरोपी शिवम अपने इलाके में रुतबे में रहा करता था और उसे अधिकतर लोग डॉक्टर साहब बोलकर ही बुलाते थे. कानपुर पुलिस की कोशिश है कि इस अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में सभी आरोपियों को कोर्ट से अधिकतम सजा मिले.
शिवम अवैध किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह का किंगपिंक
मूल रूप से आरोपी एंबुलेंस ड्राइवर शिवम जालौन का रहने वाला है और बताया जा रहा है कि 15 साल की उम्र में वह भागकर कानपुर चला आया था और कम उम्र में पैसे कमाने की चाहत में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह का किंगपिंक बन गया. दरअसल अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में आरोपी एंबुलेंस ड्राइवर शिवम ने एक दाता से किडनी के बदले चार लाख रुपए देने की बात कही, लेकिन जब पूरी रकम नहीं दिया, तब यह मामला दाता पुलिस के पास लेकर पहुंच गया और वहीं से अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का खेल का खुलासा हुआ.