नोएडा में पार्क बनाने के लिए काट डाले 60 पेड़, आम-जामुन-बरगद तक नहीं छोड़े

नोएडा। नोएडा में बढ़ती गर्मी, प्रदूषण और घटती हरियाली के बीच सेक्टर-105 में लगभग 60 पेड़ों की कटाई के आरोप ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि मकान के बगल में ग्रीन बेल्ट में पार्क बनाने के लिए एक व्यक्ति ने आम, जामुन और बरगद जैसे वर्षों पुराने पेड़ों को काटवा दिया।

यह न केवल सेक्टर की पहचान थे, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। लोगों ने इसकी शिकायत प्राधिकरण से करते हुए कहा कि पेड़ कटवाने के लिए संबंधित विभागों ने अनुमति भी नहीं ली गई।

अनुमति ली है तो उसे सार्वजिक किया जाए। फिर विभागों से पूछा जाएगा कि उन्होंने हरे-भरे पेड़ों को काटने की अनुमति कैसे दे दी। नोएडा प्राधिकरण ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आरोपित के खिलाफ थाने में मामला भी दर्ज कराया जाएगा।

अनुमति ली है तो करें सार्वजनिक
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दीपक शर्मा ने संबंधित विभागों से जांच की मांग की है। उन्होंने बताया कि बी ब्लाक में दिल्ली के एक परिवार ने ग्रीन बेल्ट की जमीन पर पार्क बनाने के लिए पेड़ काट दिए हैं।

पेड़ों को हटाने के लिए अनुमति ली है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। अन्यथा यह पता लगाया जाए कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ किसके आदेश पर और किस उद्देश्य से काटे गए। स्थानीय निवासियों ने भी इसकी शिकायत की है। उनका कहना है कि पेड़ों की छांव में लोग सुबह-शाम टहलते थे और पक्षियों का बसेरा भी इन्हीं पेड़ों पर था।

अचानक इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के गायब होने से लोगों में नाराजगी है। पार्क ही बनाना था तो पेड़ कटवाने की क्या जरूरत थी। पेड़ों के नीचे घास उगाकर वहां बैठा जा सकता था।

जेसीबी की अर्थमूवर मशीन चलवा दी
सेक्टरवासियों का आरोप है कि पेड़ों को काटने के साथ ही उस क्षेत्र को सपाट करने के लिए जेसीबी की अर्थमूवर मशीन भी चलवाई गई है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर लगातार हरित क्षेत्र कम होते जा रहे हैं, जबकि पर्यावरण संरक्षण के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं।

आरडब्ल्यूए का कहना है कि बरगद, आम और जामुन जैसे पेड़ तैयार होने में दशकों लग जाते हैं। ऐसे पेड़ों की कटाई न केवल हरियाली का नुकसान है, बल्कि शहर की प्राकृतिक विरासत पर भी चोट है।