जरूरत से ज्यादा सोचते हैं 81 प्रतिशत भारतीय, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

हर साल 22 फरवरी को वर्ल्ड थिंकिंग डे मनाया जाता है. ये दिन गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट्स से जुड़ा है. इस दिन को सामाजिक हित की तरफ सोचने लिए प्रोत्साहित किया जाता है. ये दिन दुनिया भर के युवाओं को एकजुट करने और सामाजिक-वैश्विक मुद्दों पर सोचने पर प्रेरित करता है. इसकी शुरुआत साल 1926 में हुई थी. वर्ल्ड थिंकिंग डे का उद्देश्य बेहतर भविष्य की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करना है. वहीं आज के समय में अधिकतर युवा लोग ओवरथिंकिंग की समस्या से परेशान हैं. आइए जानते हैं कितने भारतीय ओवरथिंकिंग करते हैं.

वर्ल्ड थिंकिंग डे क्यों मनाया जाता है?
वर्ल्ड थिंकिंग डे युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है. यह दिन कई मुद्दों पर अपने विचार रखने और सोचने के लिए प्रेरित करता है. इस दिन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के युवाओं को एकजुट कर समाज में पॉजिटिव चेंज लाने के लिए मोटिवेट करना है. साल 2026 वर्ल्ड थिंकिंग डे की थीम हमारी दोस्ती है.

वर्ल्ड थिंकिंग डे की शुरुआत कब और कहां हुई
वर्ल्ड थिंकिंग डे की शुरुआत 1926 में हुई थी, जब गाइड्स और स्काउट्स के एक इंटरनेशनल सम्मेलन का प्रस्ताव रखा गया था. न्यूयॉर्क में हुए चौथे सम्मेलन में गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट्स के लिए इस दिन को मनाने के बारे में विचार किया था. गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट्स आंदोलन के जनक बॉडेन पावेल थे. उन्हें के जन्म दिवस को थिंकिंग डे के रूप में मनाया जाता है.

81 प्रतिशत भारतीय ओवरथिंकिंग का हैं शिकार
सेंटर फ्रेश और यूगोव की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार भारतीयों को जरूरत से ज्यादा सोचने की आदते है. ज्यादा सोचने से बचाव के लिए भारतीय लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ले रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार 81 प्रतिशत भारतीय प्रतिदिन 3 घंटे से अधिक समय जरुरत से ज्यादा सोचने में बिताते हैं. इंडिया ओवरथिंकिंग रिपोर्ट के अनुसार 3 में से 1 इंसान ओवरथिंकिंग या जरूरत से ज्यादा सोचने की समस्या से बचाव के लिए गूगल या चैटजीपीटी का यूज करते हैं.