दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साइबर ठगी की अब तक की सबसे बड़ी वारदात सामने आई है। साइबर ठगों ने ग्रेटर कैलाश-2 में रहने वाले बुजुर्ग एनआरआइ दंपती को 18 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 14.85 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने फर्जी TRAI और आइपीएस अधिकारी बनकर पीड़िता के बैंक खाते से आठ किश्तों में यह रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई। पीड़िता 77 वर्षीय इंद्रा तनेजा और उनके पति ओम तनेजा अमेरिका सरकार में कार्यरत रह चुके हैं। दोनों वर्ष 2015-16 में सेवानिवृत्त होकर भारत लौट आए थे और वर्तमान में ग्रेटर कैलाश-2 में रह रहे हैं।
कॉल करने वाले ने खुद को अधिकारी बताया
पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 24 दिसंबर 2025 को उन्हें एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) का अधिकारी बताया और डराते हुए कहा कि उनका मोबाइल नंबर आपत्तिजनक और अभद्र कॉल करने में इस्तेमाल हुआ है। आरोपित ने दावा किया कि उनके बैंक खातों में जमा राशि काला धन है और उनकी गतिविधियां मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी हुई हैं।
स्वयं को आइपीएस अधिकारी बताते हुए गिरफ्तारी की धमकी दी
इसके बाद कॉल को कथित रूप से मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन से जोड़ा गया, जहां एक व्यक्ति ने स्वयं को आइपीएस अधिकारी बताते हुए गिरफ्तारी की धमकी दी। आरोपित ने कहा कि यदि तुरंत बैंक खातों का वेरिफिकेशन नहीं कराया गया तो पुलिस टीम को भौतिक गिरफ्तारी के लिए भेज दिया जाएगा। डर के माहौल में ठगों ने बुजुर्ग दंपती को 24 दिसंबर से 10 जनवरी तक लगातार निगरानी में रखा और किसी से संपर्क न करने की चेतावनी दी। इस दौरान आरटीजीएस के माध्यम से आठ बार में कुल 14.85 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।
सीआर पार्क थाना पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की
10 जनवरी की सुबह जब दंपती को ठगी का एहसास हुआ, तब उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सीआर पार्क थाना पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में आईएफएसओ (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) की टीम को भी शामिल किया गया है। आईएफएसओ के निदेशक ने इसे अत्यंत गंभीर साइबर अपराध बताते हुए विशेषज्ञ अधिकारियों को जांच में लगाया है।
VIDEO | Delhi: Cyber fraudsters duped an NRI elderly couple of Rs 14.85 crore in a “digital arrest” scam. The victims said they were trapped through a series of fake calls and video interactions by people posing as telecom officials and police officers, who accused them of money… pic.twitter.com/52a9veOBdn
— Press Trust of India (@PTI_News) January 11, 2026