India Rare Earth Plan : जिस दुर्लभ मिनिरल्स को लेकर चीन अपनी दादागिरी दिखाने से बाज नहीं आता अब उस रेअर अर्थ को लेकर भारत ने बड़ी तैयारी कर ली है. भारत ने रेअर अर्थ मिनिरल्स को लेकर बड़ी प्लानिंग तैयार की है. दुनिया के पांच बड़े रेअर अर्थ वाले देशों में शामिल भारत अब उसे बढ़ावा देने के लिए बड़ी तैयारी कर रहा है.
रेअर अर्थ पर भारत का प्लान
केंद्र सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में रेयर अर्थ मैग्नेट्स के लिए 7280 करोड़ रुपये की एक बड़ी योजना को मंजूरी दे दी है.रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के जरिए भारत में रेयर अर्थ के खनन से लेकर उनकी सिफाइनिंग को बढ़ावा दिया जाएगा. सात साल तक चलने वाली इस योजना में दुर्लभ खनिजों के लिए दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है. मैन्युफैक्टरिंग से लेकर सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा. इसके तहत करीब 6000 टन दुर्लभ पृथ्वी चुंबक बनाने की क्षमता को विकसित किया जाएगा.
चीन पर निर्भरता कम, अमेरिका की धौंस भी खत्म
रेयर अर्थ पर भारत खुद को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे चीन पर उसकी निर्भरता कम हो जाएगी. बता दें कि चीन रेयर अर्थका सबसे बड़ा सप्लायर है. उसके पास प्रोसेसिंगऔर रिफाइनिंग की विकसित तकनीक है. इसी बात का फायदा चीन उठाता रहा है. वो कभी भी सप्लाई रोककर पूरी दुनिया का सप्लाई चेन को डिस्टर्ब कर देता है. चीन की ओर से कई बार रेयर अर् के एक्सपोर्ट कर्ब्स लगाने की धमकी दी गई. ऐसे में भारत अब खुद को इसमें आत्मनिर्भर बनाने में जुटा है, दुनिया के कुल रेयर अर्थ कच्चे उत्पादन का 60-70% चीन करता है, जबकि वैश्विक प्रोसेसिंग का 90% हिस्सा चीन के पास है. भारत सरकार के इस प्लान से देश रेयर अर्थ में खुद को स्थापित कर सकेगा. सिर्फ स्थानीय इस्तेमाल के लिए ही नहीं बल्कि एक्सपोर्ट के लिए इनका इस्तेमाल हो सकेगा. वहीं अमेरिका जैसे तमाम बड़े देशों को चीन का विक्लप मिल जाएगा. यहीं वो रेयर अर्थ है, जिसकी वजह से अमेरिका की धौंस चीन पर नहीं चल पा रही है. भारत की इस योजना से सप्लाई चेन में नया नाम जुड़ जाएगा. अमेरिका भारत पर रौब दिखाने से पहले सोचेगा.