नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के फांसी घर मामले में अब सियासी हलचल तेज हो गई है. विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी (Privilege Committee) ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राम निवास गोयल और विधायक राखी बिड़लान को नोटिस जारी किया है. कमेटी ने सभी को 13 नवंबर को पेश होने का निर्देश दिया है, ताकि वे इस मामले पर अपना पक्ष रख सकें.
यह नोटिस दिल्ली की राजनीतिक हलचल में नया मोड़ माना जा रहा है, खासकर उस समय जब आम आदमी पार्टी (AAP) पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है.
यह नोटिस उस घटना से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली विधानसभा परिसर के अंदर बने ‘फांसी घर’ को लेकर विशेषाधिकार के उल्लंघन (Breach of Privilege) की शिकायत दर्ज हुई थी. इस मामले में विधानसभा की समिति ने प्राथमिक जांच के बाद सभी चारों नेताओं को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का आदेश दिया है.
क्या है फांसी घर मामला?
अगस्त में मानसून सत्र के दौरान, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में 1912 के नक्शे का हवाला देते हुए कहा था कि जिस स्थान को “फांसी घर” कहा जा रहा है, वह दरअसल “टिफिन रूम” था और इस बात का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है कि यहां फांसी दी जाती थी. उन्होंने इस मुद्दे को 9 सदस्यीय प्रिविलेज कमेटी को सौंप दिया था ताकि तथ्यात्मक जांच की जा सके. समिति के अध्यक्ष भाजपा विधायक प्रद्युम्न सिंह राजपूत हैं, जबकि इसमें दो आप विधायक सुरेंद्र कुमार और राम सिंह नेताजी भी सदस्य हैं.
सचिवालय द्वारा मंगलवार को जारी नोटिस में कहा गया है, “प्रिविलेज कमेटी की बैठक 13 नवंबर 2025 को ‘फांसी घर’ की ऐतिहासिकता की जांच के लिए आयोजित की जाएगी.” इस नोटिस की प्रतियां केजरीवाल, सिसोदिया, गोयल और राखी बिड़लान को भी भेजी गई हैं. इस बीच भाजपा ने केजरीवाल से सदन को ‘गुमराह’ करने के लिए माफी की मांग की है, जबकि AAP ने सवाल उठाया है कि क्या विधायक ऐतिहासिक तथ्यों की जांच करने के योग्य प्राधिकारी हैं.
किन नेताओं को मिला नोटिस?
सूत्रों के अनुसार, प्रिविलेज कमेटी ने जिन चार लोगों को नोटिस भेजा है, उनमें शामिल हैं-
अरविंद केजरीवाल (पूर्व मुख्यमंत्री)
मनीष सिसोदिया (पूर्व उपमुख्यमंत्री)
राम निवास गोयल (पूर्व विधानसभा अध्यक्ष)
राखी बिड़लान (AAP विधायक)
सभी को 13 नवंबर को समिति के सामने पेश होकर अपनी बात रखने को कहा गया है.
कमेटी की प्रक्रिया और आगे की सुनवाई
विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी किसी भी ऐसे मामले की जांच करती है, जिसमें सदन या उसके सदस्यों के अधिकारों के उल्लंघन का आरोप हो. सुनवाई के दौरान अगर समिति को लगे कि किसी सदस्य ने विधानसभा की गरिमा या विशेषाधिकारों का हनन किया है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया की चर्चा
हालांकि इस मामले पर आम आदमी पार्टी की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ चुकी है कि फांसी घर विवाद को लेकर अब AAP नेताओं को विधानसभा में जवाब देना होगा, जो पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन सकता है.