Jammu-Kashmir News: कश्मीर के छोटे-छोटे शिया-बहुल इलाकों से शुरू हुआ ईरान की मदद के लिए चंदा इकट्ठा करने का यह अभियान न केवल पूरे कश्मीर में फैल गया है, बल्कि अब यह एकता के अभियान में भी बदल गया है. कश्मीर और लद्दाख में युद्ध से प्रभावित ईरान के लिए हाल ही में चलाए गए चंदा अभियान को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और इसमें धार्मिक व सांप्रदायिक सीमाओं से ऊपर उठकर एकता का आह्वान किया गया है. शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के स्थानीय लोगों ते साथ ही अन्य धर्मों के लोग भी अब ईरान को मदद पहुंचाने के लिए एकजुट हो गए हैं.
ईरान के लिए इकट्ठा किया चंदा
कश्मीर में शिया समुदाय द्वारा ईरान के लिए शुरू किया गया यह प्रयास बेहद तेजी से इस क्षेत्र के हाल के इतिहास में सबसे बड़े मानवीय प्रयासों में से एक बन गया है. कश्मीर घाटी के ग्रैंड मुफ्ती ने सार्वजनिक रूप से सुन्नी समुदाय के सदस्यों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह नेक काम सांप्रदायिक और धार्मिक मतभेदों से ऊपर है और समाज के हर वर्ग से इसमें योगदान देने की अपील की. उन्होंने कहा,’ यह एक मानवीय जिम्मेदारी है, जो हम सभी की है. यह वह समय है जब हमें ईरान के लोगों के लिए जितना हो सके, उतना योगदान देना चाहिए.’
मुश्किल घड़ी में साथ आए लोग
एक स्थानीय शिया इमाम, सैयद गजनफर ने कहा,’ पिछले तीन दिनों में हमने देखा है कि भाई-बहन और बच्चे बड़ी संख्या में इन चंदा अभियानों में हिस्सा लेने के लिए आगे आ रहे हैं. आज भी सुन्नी समुदाय के काफी सदस्य योगदान देने के लिए आगे आए. कुरान हमें एकता सिखाता है, न कि बंटवारा. हम यहां से मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, और हर मुसलमान को इसके लिए आगे आना चाहिए. इस मुश्किल घड़ी में लोग अपने सांप्रदायिक मतभेदों को भुलाकर एक साथ आ रहे हैं. धीरे-धीरे हम देख रहे हैं कि न केवल मुसलमान, बल्कि सभी समुदायों के लोग इस अभियान में शामिल हो रहे हैं. यह देखकर दिल को सुकून मिलता है कि हिंदू भाई भी इस चंदा अभियान में हिस्सा लेने के लिए आगे आए हैं. इस्लाम हमें यह सिखाता है कि जिस किसी पर भी ज़ुल्म हो रहा हो, चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो या सिख हमें उसकी मदद जरूर करनी चाहिए. हम इसी सिद्धांत का पालन कर रहे हैं.’
घाटी में लगे डोनेशन कैंप
पिछले कुछ दिनों से घाटी के हर जिले में शिया-बहुल इलाकों में डोनेशन कैंप लगाए गए हैं, जहां अब भारी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं. हर तबके के लोग अपनी-अपनी तरह से योगदान देने के लिए आगे आए हैं. महिलाओं को अपने निजी गहने, जिनमें सोने और चांदी के आभूषण शामिल हैं, दान करते देखा गया है, जबकि कुछ लोग तांबे के बर्तन लेकर आए हैं. यहां तक कि लोगों ने अपने वाहन और पालतू जानवर भी दान कर दिए हैं. डोनेशन सेंटरों से कुछ बेहद दिल को छू लेने वाले दृश्य सामने आए हैं, जहां सैकड़ों बच्चे अपनी गुल्लकें लेकर पहुंचे और ईरानी लोगों की मदद के लिए खुशी-खुशी अपनी जमा-पूंजी दान कर दी. मोहम्मद शफी, एक स्थानीय निवासी ने कहा,’ मैं यहां काफी समय से हूं और उन लोगों को देख रहा हूं जो दान करने आए हैं. अभी कुछ देर पहले ही, सुन्नी समुदाय की 4-5 महिलाओं ने अपने गहने और नकद पैसे दान किए. हम ईरान के लोगों के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं, जहां कोई भी पड़ोसी देश मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है. वहीं हम दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि हम उन लोगों का समर्थन करते हैं जो इस ज़ुल्म का विरोध कर रहे हैं.’
500-600 करोड़ का दिया दान
आयोजकों का अनुमान है कि पूरे कश्मीर घाटी में अब तक लगभग 500-600 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा, क्योंकि यह अभियान लगातार जोर पकड़ रहा है. प्रशासन ने इन फंडों के संग्रह की निगरानी करने और उसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियम भी जारी किए हैं. यह पहल कश्मीर की एकता और उदारता की अटूट भावना का एक सशक्त प्रमाण है. यह दिखाता है कि वैश्विक संकट के समय मानवीय उद्देश्य किस तरह अलग-अलग समुदायों और धर्मों के लोगों को एक साथ ला सकते हैं. ईरानी दूतावास ने भी कश्मीर के लोगों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया और इन मानवीय प्रयासों को आशा की किरण बताया.