पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर भारतीय जहाज शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच चुका है। यह अपने साथ एलपीजी का एक बड़ा भंडार लेकर आया है। गौरतलब है कि ईरान ने दो भारतीय जहाजों को होर्मुज से निकलने की अनुमति दी थी, इनमें एक शिवालिक है और दूसरा नंदा देवी है। शिपिंग मंत्रालय ने इससे पहले जानकारी दी थी कि इन दोनों जहाजों में से एक 16 मार्च को जबकि दूसरा 17 मार्च को भारत पहुंच जाएगा।
देश में एलपीजी संकट की खबरों के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि देश में एलपीजी के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं और जल्दी ही नए टैंकर्स भी भारत आने वाले हैं। इसी मामले पर ज्यादा जानकारी देते हुए शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा था,”फारस की खाड़ी में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, वहां पर 24 भारतीय जहाज मौजूद हैं। इनमें से दो एलपीजी जहाज शिवालिक और नंदा देवी कल देर रात सुरक्षित रूप से होर्मुज को पार कर चुके हैं और भारत आने वाले हैं।” उन्होंने बताया था कि, “इन दोनों जहाजों में लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी है और ये मुंद्र और कांडला बंदरगाह की ओर जा रहे हैं, जहाँ इनके 16 और 17 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है।” उन्होंने आगे कहा, “इस तरह अब फारस की खाड़ी में भारत के 22 जहाज बाकी हैं, जिनमें कुल 611 नाविक सवार हैं।”
इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा था कि ईरान के साथ सीधा संवाद ही होर्मुज के रास्ते यातायात फिर से शुरू करने का सबसे प्रभावी तरीका है। उन्होंने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इस मुद्दे पर अभी ईरान के साथ कोई समझौता है, उन्होंने कहा कि यह बातचीत मामला-दर- मामला आगे बढ़ रही है। शिवालिक और नंदा देवी जहाजों का हालिया सुरक्षित पार होना इसी कूटनीतिक प्रयास का व्यावहारिक परिणाम है। विदेश मंत्री ने बताया कि भारत अभी बाकी बचे 22 जहाजों को भी सुरक्षित रूप से होर्मुज से निकालने का प्रयास कर रहा है, जल्दी ही यह जहाज भी भारत आ जाएंगे।
खत्म होगा एलपीजी संकट?
भारत पहुंचे और शिवालिक और रास्ते में मौजूद नंदादेवी जहाज में करीब 97,700 मीट्रिक टन एलपीजी गैस मौजूद हैं। विशषज्ञों के मुताबिक इतनी मात्रा से घरेलू रूप से उपयोग किए जाने वाले करीब 60 लाख से ज्यादा सिलेंडर भरे जा सकते हैं। इसके अलावा भारत की रिफानरियां भी अपने सर्वोच्च स्तर पर काम कर रही हैं, जिनसे भारत का एलपीजी उत्पादन करीब 28 फीसदी तक बढ़ गया है। आने वाले समय में और भी जहाजों को भारत आने की संभावना है। ऐसे में यह स्तर एलपीजी के प्रवाह को पूरे भारत से सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए संतोषजनक स्थिति उत्पन्न करता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से भी इस बात पर जोर दिया गया था कि भारत में एलपीजी और पेट्रोल की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, हालांकि भविष्य में ऊर्जा संकट की आशंका को देखते हुए सरकार पर्याप्त कदम उठा रही है। अब, जबकि जहाजों का आना शुरू हो गया है, तो यह स्थिति और भी ज्यादा सामान्य हो रही है।