कभी-कभी जिंदगी का आखिरी मोड़ वहीं आ जाता है, जहां से आगे खुशियों की उम्मीद होती है. कर्नाटक के तुमकुरु जिले में एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां रिटायरमेंट से कुछ ही दिन पहले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने अपनी ही दफ्तर में फांसी लगाकर जान दे दी. 60 वर्षीय अधिकारी का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने सीनियर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इस घटना ने पूरे सामाजिक कल्याण विभाग में हड़कंप मचा दिया है और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
दफ्तर में मिला शव, जांच में जुटी पुलिस
यह घटना पावगड़ा, तुमकुरु जिले की है, जहां सामाजिक कल्याण विभाग के सहायक निदेशक मल्लिकार्जुन का शव शुक्रवार शाम उनके ही कार्यालय में फंदे से लटका मिला. पुलिस के अनुसार, मल्लिकार्जुन अगले ही हफ्ते मार्च के आखिरी दिनों में रिटायर होने वाले थे. लेकिन उससे पहले ही उन्होंने यह खौफनाक कदम उठा लिया. घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी.
व्हाट्सऐप वीडियो में लगाए गंभीर आरोप
पुलिस जांच में सामने आया है कि मल्लिकार्जुन ने आत्महत्या से पहले अपने दोस्तों को व्हाट्सऐप पर एक वीडियो भेजा था. इस वीडियो में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह आत्महत्या करने जा रहे हैं. वीडियो में उन्होंने अपने जॉइंट डायरेक्टर कृष्णप्पा पर लगातार प्रताड़ना और मानसिक दबाव डालने का आरोप लगाया. मल्लिकार्जुन ने कहा कि इसी वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है.
भगवान उसे सजा देगा…
वीडियो में मल्लिकार्जुन बेहद भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया, लेकिन अधिकारी कृष्णप्पा की कथित प्रताड़ना ने उन्हें तोड़ दिया. उन्होंने कहा, “भगवान उसे सजा देगा, कानून भी उसका हिसाब करेगा.” साथ ही उन्होंने यह भी अपील की कि उनके परिवार को किसी तरह की बदले की भावना न रखनी चाहिए. यह आखिरी संदेश अब पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा बन गया है.
परिवार की शिकायत पर केस दर्ज, जांच तेज
मल्लिकार्जुन की पत्नी की शिकायत के आधार पर पावगड़ा टाउन पुलिस ने जॉइंट डायरेक्टर कृष्णप्पा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment) का मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें वायरल वीडियो और अन्य सबूतों को भी शामिल किया जा रहा है. यह घटना न सिर्फ विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि कार्यस्थल पर मानसिक उत्पीड़न के गंभीर मुद्दे को भी उजागर करती है.