भारत में हाई ब्लड प्रेशर यानी Hypertension एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट के अनुसार, देश में 21 करोड़ से ज्यादा वयस्क (30-79 साल) इस बीमारी से प्रभावित हैं। यह देश की कुल आबादी का लगभग 30% है। ज्यादातर लोग अपनी स्थिति से अनजान हैं और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।
आंकड़े बताते हैं गंभीरता
पीड़ितों की संख्या: 21 करोड़ से अधिक।
जानकारी का अभाव: केवल 39% लोग जानते हैं कि वे High BP से पीड़ित हैं।
नियंत्रण की कमी: 83% लोगों का ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं है। केवल 17% मरीजों का ही BP नियंत्रण में है।
हाई ब्लड प्रेशर दिल और मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव डालता है। अगर समय पर इसका इलाज न हो, तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर, आंखों की समस्या और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
दुनिया भर की स्थिति
2024 में वैश्विक स्तर पर 140 करोड़ लोग High BP से पीड़ित थे, जो विश्व की 34% आबादी है। लेकिन हर पांच में से सिर्फ एक व्यक्ति ही दवा या जीवनशैली सुधार के जरिए इसे नियंत्रित कर पाता है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयसस के अनुसार, हर घंटे 1,000 से ज्यादा लोग High BP से जुड़ी बीमारियों के कारण मर रहे हैं।
इलाज तक पहुंचने में बाधाएं
195 देशों में से 99 देशों में कंट्रोल रेट 20% से कम है।
गरीब देशों में दवाओं की उपलब्धता केवल 28%, जबकि अमीर देशों में 93% है।
मुख्य कारण: कमजोर नीतियां (अत्यधिक नमक, शराब, तंबाकू, ट्रांस फैट), महंगी दवाएं, डॉक्टरों की कमी, जांच के उपकरण और सप्लाई चेन की समस्या।
डॉ. टॉम फ्राइडन का कहना है कि सस्ती और सुरक्षित दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन करोड़ों लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। यदि यह कमी दूर की जाए, तो लाखों जानें बच सकती हैं और अरबों डॉलर की बचत भी होगी।