मनाली से चमोली तक पहाड़ पैक, सड़कें ब्लॉक! हिल स्टेशंस पर उमड़ी लाखों की भीड़

चमोली: गर्मी की छुट्टियों, लंबे वीकेंड और सुहावने मौसम के चलते हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर इन दिनों भारी भीड़ देखने को मिल रही है. कुल्लू-मनाली से लेकर धर्मशाला, शिमला, डलहौजी और बदरीनाथ धाम तक पर्यटकों और श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है. एक ओर पर्यटन कारोबार में जबरदस्त उछाल आया है, तो दूसरी ओर कई स्थानों पर ट्रैफिक व्यवस्था और बढ़ती भीड़ प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है.

कुल्लू-मनाली जाने वालों से हाईवे पर लगा महाजाम
हिमाचल प्रदेश में पर्यटन सीजन अपने चरम पर है. वीकेंड के दौरान कुल्लू-मनाली की ओर जाने वाले हजारों पर्यटकों के कारण चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम देखने को मिला. पंडोह के 7 मील से लेकर औट तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं और कई घंटों तक गाड़ियां रेंगती हुई आगे बढ़ती नजर आईं.

पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए हाईवे पर 40 अतिरिक्त जवानों की तैनाती की है. मंडी पुलिस के अनुसार, बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में वाहन कुल्लू-मनाली पहुंच रहे हैं, जिससे यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है. पंडोह से औट तक फोरलेन का काम अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है और पिछले वर्षों की आपदाओं से सड़क को हुए नुकसान के कारण कई वाहन पुराने हाईवे से गुजर रहे हैं.

यही वजह है कि पर्यटन सीजन में यहां बार-बार जाम की स्थिति बन रही है. पिछले वीकेंड में करीब 17 हजार वाहन इस मार्ग से कुल्लू-मनाली पहुंचे थे और इस बार भी हजारों पर्यटक वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई.

धर्मशाला में बारिश, सुहावना मौसम
धर्मशाला में भी वीकेंड के दौरान पर्यटकों की भारी आमद देखने को मिली. देश के विभिन्न हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग धर्मशाला पहुंचे. शहर की प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ा, लेकिन इसके बावजूद पर्यटक यहां के मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते दिखाई दिए.

मैच की वजह से भीड़ और बढ़ी
हल्की बारिश ने मौसम को और भी खुशनुमा बना दिया. मैक्लोडगंज और आसपास के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की अच्छी-खासी भीड़ रही. इसके साथ ही धर्मशाला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में होने वाले भारत और अफगानिस्तान के बीच वनडे मुकाबले को लेकर भी खास उत्साह देखने को मिला.

होटल व्यवसायियों और स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि मैच के कारण आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है. कई होटलों में ऑक्युपेंसी 100 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई है. होटल, रेस्तरां और टैक्सी कारोबारियों को भी इससे अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद है.

रिकॉर्ड भीड़ से गुलजार पर्यटन नगरी मनाली
मनाली में इस समय पर्यटकों का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा हुआ है. आंकड़ों के अनुसार, बीते 13 दिनों में करीब 3 लाख पर्यटक कुल्लू-मनाली पहुंचे हैं. अटल टनल रोहतांग, रोहतांग पास, शिंकुला और बारालाचा जैसे पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ देखी जा रही है. पिछले पांच दिनों में अटल टनल से 50 हजार से अधिक वाहन गुजरे, जबकि अकेले मनाली में लगभग 15 हजार बाहरी वाहनों की एंट्री दर्ज की गई.

पर्यटन कारोबारियों के अनुसार, इस बार का सीजन पिछले वर्ष की तुलना में कहीं बेहतर रहा है. होटल, होमस्टे और एयरबीएनबी में लगभग 90 प्रतिशत तक ऑक्युपेंसी दर्ज की गई है. हालांकि, बढ़ती भीड़ के साथ ट्रैफिक जाम सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरा है. कई स्थानों पर एक किलोमीटर की दूरी तय करने में भी एक घंटे तक का समय लग रहा है. इसका असर पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और कार्यालय जाने वालों पर भी पड़ रहा है.

टैक्सी चालकों का कहना है कि पर्यटक कई-कई घंटे जाम में फंसे रहते हैं, जिससे उन्हें पर्यटन स्थलों पर पर्याप्त समय नहीं मिल पाता. वहीं पर्यटकों का कहना है कि मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से राहत के लिए मनाली सबसे पसंदीदा स्थान बना हुआ है, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है.

शिमला बना लॉन्ग वीकेंड पर सैलानियों की पहली पसंद
राजधानी शिमला में भी लॉन्ग वीकेंड के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली. पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में शिमला के प्रवेश बिंदु शोघी से करीब साढ़े आठ लाख वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई थी, जबकि जून में भी लाखों वाहन शहर में प्रवेश कर चुके हैं. बीते 24 घंटों में लगभग 35 हजार वाहनों की एंट्री हुई.

इसके बावजूद पुलिस का दावा है कि ट्रैफिक व्यवस्था काफी हद तक नियंत्रण में रही. पर्यटकों ने भी माना कि कालका-शिमला फोरलेन बनने से यात्रा आसान हुई है और पहले की तुलना में लंबे जाम की समस्या कम हुई है. शिमला का सुहावना मौसम, बादलों से घिरे पहाड़ और ऐतिहासिक रिज मैदान सैलानियों को खूब आकर्षित कर रहे हैं. होटल उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, इस बार गर्मियों के पर्यटन सीजन में 70 से 80 प्रतिशत तक ऑक्युपेंसी दर्ज की जा रह

ी है और कारोबार में अच्छे उछाल की उम्मीद है.

डलहौजी में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था से राहत
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल डलहौजी में भी इन दिनों पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है. जून का आधा महीना बीत जाने के बावजूद यहां ठंड का एहसास बना हुआ है, जो मैदानी इलाकों से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है. रोजाना सैकड़ों वाहन डलहौजी पहुंच रहे हैं और लोग सुहावने मौसम का आनंद ले रहे हैं.

विशेष बात यह है कि डलहौजी में लागू वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था के कारण जाम की समस्या काफी हद तक नियंत्रण में है. इससे न केवल पर्यटकों को सुविधा मिल रही है, बल्कि स्थानीय लोग भी राहत महसूस कर रहे हैं. डलहौजी के साथ-साथ खज्जियार और चंबा भी पर्यटकों से गुलजार हैं.

बदरीनाथ धाम में आस्था का नया रिकॉर्ड
उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में इस बार श्रद्धालुओं का उत्साह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. 23 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से अब तक 10 लाख 70 हजार से अधिक श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर चुके हैं और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है.

बारिश, ठंड और कई स्थानों पर लगने वाले जाम के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष पुरुषोत्तम मास के कारण यात्रा को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है, जिसके चलते देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं. गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और दक्षिण भारत सहित विभिन्न राज्यों से लोग यात्रा कर रहे हैं.

बदरीनाथ धाम में श्रद्धालु भगवान विष्णु के मंत्रों और भजनों के बीच आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर रहे हैं. वहीं हेमकुंड साहिब में भी 80 हजार से अधिक श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यात्रा सीजन से छोटे कारोबारियों, प्रसाद विक्रेताओं और स्थानीय उत्पाद बेचने वालों को अच्छा लाभ मिल रहा है. यात्रियों का कहना है कि बेहतर व्यवस्थाओं और सुगम यात्रा मार्गों के कारण उनकी यात्रा यादगार बन रही है.

कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर इस समय जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है. जहां एक ओर पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बड़ा लाभ मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं.