West Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव में जब घड़ी की सुई ने जब 5 बजाया तो चुनाव आयोग ने आंकड़ा जारी किया, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. शाम 5 बजे तक बंगाल चुनाव के पहले चरण में करीब 90 फीसदी वोटिंग हो चुकी थी. दक्षिण दिनाजपुर में 93.12 प्रतिशत वोट पड़े. बंगाल में इस बार दो चरण में मतदान हो रहा है. जबकि 2021 के चुनाव में 8 चरणों में चुनाव हुआ था.
क्या है बंपर वोटिंग के पीछे का राज?
सियासी पंडित मानते आए हैं कि जब भी जनता जोरशोर से वोट करती है तो इसका मतलब होता है कि वह मौजूदा सरकार से खफा है. लेकिन बंगाल के लिए कुछ कहना जल्दबाजी होगी. बंगाल चुनाव में पहले चरण में बंपर वोटिंग के मायने आपको समझाएंगे. लेकिन पहले जान लीजिए कि पिछले विधानसभा चुनाव में कितने चरणों में और कितने प्रतिशत वोटिंग हुई थी.
2021 में क्या थी स्थिति?
2021 में बंगाल में 8 चरणों में मतदान हुआ था. PIB के मुताबिक, उस वक्त कोरोना महामारी का दौर था. लिहाजा पहले फेज में 30 सीटों पर वोट डाले गए थे. यानी 84.63 फीसदी मतदान हुआ था. दूसरे चरण में भी 30 सीटों पर मतदान हुआ और प्रतिशत रहा 86.11. तीसरे चरण में 31 सीटों पर वोटिंग हुई और 84.61 फीसदी वोट पड़े. 44 सीटों पर वोटिंग चौथे चरण में हुई और प्रतिशत रहा 79.90 फीसदी. पांचवें चरण में 45 सीटों पर वोटिंग हुई. यानी करीब 82.49 फीसदी मतदान. छठे चरण में 43 सीटों पर वोटिंग हुई. सातवें चरण में 34 सीटों पर वोटिंग हुई थी और करीब 75.06 फीसदी वोट पड़े. आठवें चरण में 35 सीटों पर वोट पड़े थे और 76.07 फीसदी मतदान हुआ.
ममता बोलीं-SIR में कटे लोगों के नाम
अब इतनी ज्यादा तादाद में बंपर वोटिंग के मायने जान लेते हैं. इस बारे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर में लाखों लोगों के नाम काट दिए गए थे. लोग इसे अपने अधिकारों की रक्षा के तौर पर देख रहे हैं. वो इसलिए क्योंकि बीजेपी डीलिमिटेशन और एनआरसी को लागू करना चाहती है.
ममता की दलील भले ही अलग हो. लेकिन बंगाल चुनाव में इस बार बीजेपी का चुनाव प्रचार ज्यादा आक्रामक रहा है. पीएम नरेंद्र मोदी धुआंधार रैलियां कर रहे हैं तो अमित शाह बंगाल में डेरा डाले हुए हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की रैलियों भी काफी भीड़ देखने को मिल रही है.
टीएमसी के सामने एंटी-इन्कमबेंसी की चुनौती
वहीं, पिछले 15 साल के दौरान टीएमसी के आगे सबसे बड़ी चुनौती एंटी-इनकम्बेंसी की रही है. टीएमसी के नेता और मंत्री कथित भ्रष्टाचार में शामिल रहे हैं.
साल 2021 में जब ममता बनर्जी तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं तो टीएमसी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के काफी मामले सामने आए थे. उनके खिलाफ सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मामले भी दर्ज कराए थे.
TMC, बंगाल में SIR को लागू करने के लिए EC की तरफ से उठाए गए कई सख्त कदमों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. इन कदमों में माइक्रो ऑब्जर्वर से लेकर ‘तार्किक विसंगतियों’ और फैसलों तक सब कुछ शामिल है.
TMC लगातार आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग बीजेपी का साथ दे रहा है और SIR प्रक्रिया के जरिए असली वोटरों के एक बड़े हिस्से को बाहर कर दिया गया है. BJP ने TMC के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि SIR ने उन ‘फर्जी वोटरों’ को हटा दिया है, जिनका इस्तेमाल TMC कथित तौर पर सत्ता में बने रहने के लिए करती थी.
फैसले की प्रक्रिया में 27 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए. 2021 के चुनावों में, TMC और BJP को मिले कुल वोटों की संख्या में 60.62 लाख का अंतर था, जो 2024 के लोकसभा चुनावों में घटकर 42.43 लाख रह गया था.
हालांकि, TMC दावा कर रही है कि वोटरों के नाम हटाने को लेकर चल रहा यह विवाद उसके चुनावी संभावनाओं को मजबूत करेगा. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उनके रिश्तेदार BJP को वोट नहीं देंगे, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. SIR का दांव BJP पर ही उल्टा पड़ेगा. जिस तरह से CM ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में आम लोगों की तरफ से SIR का मामला लड़ा है, वह इतिहास बन गया है. क्या आपको लगता है कि लोग इस बात को भूल जाएंगे?’
क्या ध्रुवीकरण पलटेगा पासा?
ध्रुवीकरण इस चुनाव में एक बड़ा फैक्टर साबित होगा. माना जा रहा है कि मुस्लिम वोट तो ममता की तरफ जाएंगे और बीजेपी हिंदू वोटों को और भी ज्यादा अपने पाले में लाना चाहती है. BJP के एक सीनियर नेता ने कहा था, ‘2019 से, जब हमने बंगाल में अच्छा प्रदर्शन किया था, और 2021 और 2024 में, जब हमारा प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा, हमारा वोट शेयर लगभग एक जैसा ही रहा है. हम समझते हैं कि हमें मुसलमानों के वोट नहीं मिलेंगे. लेकिन अगर हमें हिंदुओं के ज्यादा वोट मिलते हैं, तो हम बहुमत के जादुई आंकड़े (153 सीटें) तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं.’
बंगाल की आबादी में 30 फीसदी मुस्लिम
मुस्लिम समुदाय, जिसकी राज्य की आबादी में लगभग 30% हिस्सेदारी है, ने 2011 से ज्यादातर TMC का ही साथ दिया है. इसी साल ममता ने लेफ्ट फ्रंट सरकार के 34 साल के शासन को खत्म किया था.
TMC के लिए अपने मुस्लिम समर्थक आधार को बनाए रखना एक चुनौती है, क्योंकि इस समुदाय के एक हिस्से में OBC लिस्ट, वक्फ कानून लागू होने और दूसरी वजहों को लेकर नाराजगी दिख रही है. कांग्रेस, ISF, AJUP और AIMIM जैसी दूसरी विपक्षी पार्टियां भी TMC के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं. अभी दूसरे चरण का मतदान बाकी है. अगर उसमें भी बंपर वोटिंग होती है तो मुमकिन है कि 4 मई को तो नतीजा आए, वह बेहद चौंकाने वाला हो. क्योंकि यह टीएमसी के भी पक्ष में जा सकता है और बीजेपी के भी.