होर्मुज पर सस्पेंस ही सस्पेंस! अमेरिका या ईरान…अभी किसका कंट्रोल, किसके दावे में कितना दम?

Hormuz Latest News: ईरान और अमेरिका के बीच लगभग 40 दिनों तक भीषण युद्ध चला. इसके बाद सीजफायर का ऐलान किया गया और पाकिस्तान में शांति वार्ता बुलाई गई. लेकिन यह बातचीत बेनतीजा रही. बातचीत बेनतीजा रहने का सबसे बड़ा कारण होर्मुज पर किसका दबदबा रहेगा यह रहा. फिलहाल शांति वार्ता के बाद ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे को लेकर सस्पेंस की आग धधक रही है. अमेरिका और ईरान आमने-सामने खड़े हैं. तेल का यह अहम रास्ता किसके हाथ में है? सवाल हर किसी को परेशान कर रहा है. दोनों देश अपने दावों पर जिद्दी बने हुए हैं. लेकिन इन दावों में कितना दम है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्ती ने माहौल गरमा दिया है. ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं. कई देशों की अर्थव्यवस्था इसी रास्ते पर टिकी हुई है. दुनिया की आधी से ज्यादा तेल सप्लाई इसी रास्ते पर निर्भर है. एक छोटी गलती से ग्लोबल इकोनॉमी हिल सकती है. क्या अमेरिका का ब्लॉकेड काम कर रहा है? या ईरान की धमकी असली है? सस्पेंस हर घंटे बढ़ता जा रहा है. दोनों तरफ से बयान आ रहे हैं. आखिर सवाल है कि हकीकत क्या है? दरअसल गुरुवार को ईरानी जहाज को अमेरिका ने होर्मुज से वापस लौटाया है इसके बाद तनाव बढ़ गया है.

सीजफायर के बावजूद हालात सामान्य नहीं हैं. पाकिस्तान में हुई बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची. इसके बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए. अब यह टकराव सिर्फ दो देशों का नहीं रहा. इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. तेल बाजार में हलचल है. शिपिंग कंपनियां सतर्क हो गई हैं. हर देश चाहता है कि यह अहम रास्ता खुला रहे. लेकिन जमीन और समुद्र पर चल रही रणनीतिक चालें इस रास्ते को सबसे बड़ा ‘फ्लैशपॉइंट’ बना चुकी हैं.

ट्रंप का ब्लॉकेड vs ईरान की चेतावनी
ट्रंप और ईरान के ताजा बयानों ने माहौल फिर से गरमा दिया है. पाकिस्तान में हुई लंबी शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद ट्रंप ने तुरंत ब्लॉकेड का ऐलान कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों को घेर लिया है और होर्मुज के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दूसरी ओर ईरान ने इस कदम को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया और कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी. CENTCOM के मुताबिक यह ब्लॉकेड सोमवार से लागू है और पूरी तरह प्रभावी तरीके से काम कर रहा है. यहां तक कि सोमवार को लागू ब्लॉकेड के बाद गुरुवार को ईरानी जहाज तक को भी वापस कर दिया गया.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने ओमान की ओर से जहाजों को निकालने का प्रस्ताव दिया था लेकिन अमेरिका ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. ट्रंप ने फॉक्स बिजनेस से बातचीत में कहा कि अमेरिकी नौसेना हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और किसी भी खतरे को तुरंत खत्म कर दिया जाएगा. वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बीबीसी को दिए बयान में कहा कि कोई भी दुश्मन ईरान पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकता और हर कोशिश नाकाम होगी. दोनों देशों के इन सख्त बयानों का असर वैश्विक बाजार पर भी दिखा है. तेल की कीमतों में उछाल आया है और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है.
समुद्र में क्या हो रहा है?

ट्रंप ने रॉयटर्स को दिए एक और बयान में दावा किया कि ब्लॉकेड पूरी तरह लागू है और ईरान अब सामान्य व्यापार नहीं कर पा रहा. इसी बीच CENTCOM ने 16 अप्रैल को एक अहम अपडेट देते हुए बताया कि एक ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज जो बंदर अब्बास से निकला था उसने अमेरिकी ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश की. लेकिन USS Spruance डिस्ट्रॉयर ने उसे सफलतापूर्वक रोककर वापस मोड़ दिया. CENTCOM के अनुसार अब तक 10 जहाजों को वापस भेजा जा चुका है और एक भी जहाज ब्लॉकेड को पार नहीं कर पाया है. ईरान ने इसे खुली दुश्मनी करार दिया हालांकि उसने अभी तक कोई सीधा सैन्य कदम नहीं उठाया है.

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
यही वजह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव इतना गंभीर हो गया है. यह महज 21 किलोमीटर चौड़ा रास्ता है, लेकिन दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी से गुजरती है. एक तरफ ईरान इसकी भौगोलिक पकड़ का दावा कर रहा है तो दूसरी तरफ अमेरिका अपनी नौसेना के जरिए ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ लागू करने की बात कर रहा है. फिलहाल ब्लॉकेड के चलते संतुलन अमेरिका के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है लेकिन हालात अब भी बेहद नाजुक हैं और किसी भी वक्त बदल सकते हैं.