नोएडा : हरियाणा के सिंघवा खास गांव में राधा की उपलब्धि पर उत्सव का माहौल है। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ ईश्वर सिंह का स्वागत किया। इस ऐतिहासिक सफलता से हरियाणा के पशुपालकों के लिए प्रेरणा मिली है और यह प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
हरियाणा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह पशुपालन की राजधानी है। हिसार जिले के गांव सिंघवा खास के पशुपालक ईश्वर सिंह सिंघवा की मुर्रा नस्ल की भैंस ‘राधा’ ने दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता में 35.669 किलो दूध देकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड कैथल जिले की भैंस ‘रेशमा’ के नाम था, जिसने 33.800 किलो दूध दिया था।
प्रतियोगिता पशुपालन विभाग के गांव सिंघवा खास पशु अस्पताल परिसर में आयोजित की गई थी। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हांसी एसडीओ डॉ. जगबीर ढांडा, डॉ. प्रदीप, वीएलडीए प्रदीप, सरपंच ओमप्रकाश, अशोक, अनूप, राकेश और सोनी।
राधा के मालिक ईश्वर सिंह और उनके पिता रिटायर्ड पीटीआई होशियार सिंह लंबे समय से मुर्रा नस्ल की भैंसों की देखभाल और उत्कृष्ट पालन के लिए प्रसिद्ध हैं। राधा को फतेहाबाद जिले के कन्नड़ी गांव से खरीदा गया था। पशुपालकों ने इसकी कीमत 15 लाख रुपये लगाई, लेकिन ईश्वर सिंह कहते हैं कि राधा केवल एक भैंस नहीं, बल्कि परिवार का गौरव है और इसे करोड़ों में भी नहीं बेचा जाएगा।
सिंघवा खास गांव में राधा की उपलब्धि पर उत्सव का माहौल है। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ ईश्वर सिंह का स्वागत किया। इस ऐतिहासिक सफलता से हरियाणा के पशुपालकों के लिए प्रेरणा मिली है और यह प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
मुर्रा नस्ल की भैंसें उच्च दुग्ध उत्पादन और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। राधा से पहले ईश्वर सिंह की भैंस ‘धन्नो रानी’ ने भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने जलवे दिखाए हैं। 25 साल की उम्र में भी धन्नो की सेवा उतनी ही श्रद्धा से हो रही है जितनी दूध देने के समय थी। धन्नो ने देशभर में छह बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती और मार्च 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित की गई।
राधा का यह रिकॉर्ड हरियाणा की पशुपालन परंपरा और किसानों की मेहनत का प्रतीक है, जो पूरे देश में राज्य की पहचान को और मजबूत करता है।