सऊदी अरब भी भारत से दोस्ती बढ़ा रहा, रियाद में जो हुआ, सुनकर पाकिस्तान को लगेगा सदमा!

रियाद: पश्चिम एशिया का एक और की-प्लेयर भारत के साथ नजदीकियां बढ़ाने में जुट गया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ मजबूत रिश्तों की मिसाल तो पूरी दुनिया देख ही रही थी, लेकिन अब खाड़ी देश के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर खिलाड़ी सऊदी अरब ने भी भारत के साथ अपनी दोस्ती को एक नए और बेहद एडवांस मुकाम पर ले जाने का पूरी प्लानिंग कर ली है. बदलती जियो पॉलिटिक्स के बीच सऊदी अरब में एक दो महा-बैठकें हुई हैं. इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच डिफेंस डील को लेकर जो खिचड़ी पक रही है, उसे सुनकर पाकिस्तान के होश उड़ने वाले हैं.

भारत-सऊदी अरब की मीटिंग में हुई क्या बातचीत?
इस पूरी महा-मीटिंग की शुरुआत जेद्दा शहर से हुई, जहां भारत और सऊदी अरब के बड़े अधिकारियों के बीच बेहद गोपनीय और जमीनी मुद्दों पर बातचीत हुई. जेद्दा में भारत के महावाणिज्यदूत फहद अहमद खान सूरी और सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की मदीना शाखा के महानिदेशक इब्राहिम बिन सईद अल-सुभी एक टेबल पर आमने-सामने बैठे और दोनों के बीच काफी लंबी गुफ्तगू हुई.

सऊदी अरब भारत के लिए सिर्फ कच्चे तेल का आयात करने का जरिया नहीं है, बल्कि वहां रहने वाले लाखों भारतीय दोनों देशों की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं. यही वजह है कि सऊदी अरब भारत के साथ हर छोटे-बड़े मुद्दे पर लगातार संपर्क में बना हुआ है और भारतीयों की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है.

सिर्फ कूटनीति नहीं, अब डिफेंस में भी साथ आएंगे भारत-सऊदी

भारत और सऊदी अरब की यह नई और गहरी होती दोस्ती अब सिर्फ बैठकों, मीठी बातों और कागजी दावों तक सीमित नहीं रहने वाली है. इसमें अब असली ट्विस्ट आ चुका है, जो सीधे तौर पर मिलिट्री और डिफेंस से जुड़ा हुआ है. जिस दिन जेद्दा में दोनों देशों के राजनयिक मिल रहे थे, ठीक उसी दिन सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी एक और बहुत बड़ी डिफेंस मीटिंग चल रही थी. सऊदी अरब में भारत के राजदूत डॉ सुहेल अजाज खान ने सीधे सऊदी रक्षा मंत्रालय के जनरल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इयाद अब्दुलमलिक अल-अलशेख से मुलाकात कर डाली, जिसने पाकिस्तान जैसे देशों के कान खड़े कर दिए हैं.

साझेदारी के नए क्षेत्र: दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने रक्षा सहयोग को सुदृढ़ बनाने तथा मिलिट्री, अत्याधुनिक हथियारों और टेक्नोलॉजी की साझेदारी के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर प्लानिंग की.

रणनीतिक पार्टनरशिप पर मुहर: रियाद में मौजूद भारतीय दूतावास ने आधिकारिक तौर पर बताया कि ये वार्ता भारत और सऊदी अरब की रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने, सहयोग के नए अवसरों की पहचान करने और भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों को बेहद मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को साफ दिखाती है.

पाकिस्तान को क्यों लगेगा सदमा?
दरअसल, पाकिस्तान हमेशा से खुद को सऊदी अरब का सबसे करीबी सैन्य मददगार मानता आया है. पिछले साल ही 17 सितंबर 2025 को पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक बहुत बड़ी डिफेंस डील साइन की थी, जिसे ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ (SMDA) कहा जाता है. इस डील के तहत दोनों देशों ने नाटो जैसी कसम खाई थी कि एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा और पाकिस्तान के करीब 80 हजार सैनिक सऊदी की सुरक्षा में तैनात होने की बात भी सामने आई थी.

अब पाकिस्तान का यह गुमान टूटने वाला है क्योंकि सऊदी अरब अब पाकिस्तान के दबाव में रहने वाला पुराना देश नहीं रहा. वो अपनी विदेश नीति को बिल्कुल आजाद रख रहा है. वो पाकिस्तान से सैनिक सुरक्षा तो ले रहा है, लेकिन भारत से आधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनने वाले स्वदेशी हथियार, मिसाइलें और राडार सिस्टम खरीदने के लिए हाथ बढ़ा रहा है.

सऊदी अरब को अच्छे से पता है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और उसके तेल का एक बहुत बड़ा खरीदार है. ऐसे में भारत की आधुनिक मिलिट्री पावर और टेक्नोलॉजी के सामने पाकिस्तान की कंगाली सऊदी को भी खटकने लगी है. सऊदी अरब अब रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद पार्टनर मान रहा है, जो पाकिस्तान के लिए किसी बड़े कूटनीतिक झटके से कम नहीं है.

NSA अजीत डोभाल ने रखी थी डील्स की नींव
सऊदी अरब का भारत की तरफ ये जो तगड़ा और ऐतिहासिक झुकाव दिख रहा है, ये अचानक या रातों-रात नहीं हुआ है. इसके पीछे भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की वो सोची-समझी, अचूक कूटनीति है, जो उन्होंने कुछ समय पहले ही सऊदी की धरती पर चली थी. इससे पहले अप्रैल के महीने में अजीत डोभाल ने सऊदी अरब की एक बहुत ही महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल आधिकारिक यात्रा की थी.

वहां उन्होंने सऊदी नेतृत्व के सबसे सीनियर और ताकतवर अधिकारियों के साथ कई बैक-टू-बैक उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लिया था, जिसमें इस पूरी डिफेंस और रणनीतिक पार्टनरशिप की मजबूत नींव रखी गई थी.

एनर्जी और रीजनल सिक्योरिटी: अजीत डोभाल की उस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच एनर्जी सहयोग को बढ़ावा देना और मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालातों पर अपनी सुरक्षा चिंताओं को एक-दूसरे के साथ साझा करना था.

सऊदी के दिग्गजों से सीधी बात: डोभाल ने अपनी यात्रा के दौरान सऊदी अरब के बेहद प्रभावशाली ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसाएद अल-ऐबान के साथ सीधी और क्लोज-डोर डीलिंग की थी. इसी का नतीजा है कि आज दोनों देशों के बीच रक्षा और कूटनीति की रफ्तार दोगुनी हो चुकी है.