बांग्लादेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने की आहट सुनाई दे रही है. दो साल पहले जिस शेख हसीना को सत्ता से उखाड़ फेंका गया था, वही शेख हसीना अब बांग्लादेश लौट रही हैं. भारत में शरण लिए बैठीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वह निर्वासन की जिंदगी और नहीं जिएंगी और इसी साल बांग्लादेश लौटेंगी. अब मुश्किल बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सामने है. क्या वे बदले की भावना में हसीना के लिए फांसी का फंदा चुनेंगे, या लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगे. जो भी होगा, भारत और अमेरिका की नजर जरूर होगी. इस बीच जमात ने बांग्लादेश सरकार से पूछा है कि क्या आप शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को फिर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं?
शेख हसीना ने अपने इरादे बिल्कुल साफ कर दिए हैं. बांग्लादेश की अदालतें उनके खिलाफ जो फैसले सुना रही हैं, उसे खारिज करते हुए शेख हसीना ने कहा, मेरे खिलाफ आया फैसला न्याय नहीं है. यह पूरी तरह से गैर-कानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है. अवामी लीग को नेता-विहीन बनाने के लिए न्यायपालिका को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.”
‘मुझे मौत से डर नहीं लगता’
कट्टरपंथियों की धमकियों का जवाब देते हुए हसीना ने अपने पिता शेख मुजीबुर्रहमान और परिवार की हत्या को याद किया. उन्होंने कहा, मुझे मौत से डर नहीं लगता. 1975 में मैंने अपने माता-पिता, भाइयों और लगभग पूरे परिवार को खो दिया. मुझ पर ग्रेनेड से हमले हुए, लेकिन मैं साजिशों का जाल तोड़कर हमेशा अपने लोगों के साथ खड़ी रही. लगातार पांच बार प्रधानमंत्री रहने वालीं हसीना ने साफ कर दिया है कि उनका पूरा जीवन बांग्लादेश के विकास से जुड़ा है और वह हर बाधा को पार करते हुए इसी साल अपने वतन लौटेंगी.
तारिक रहमान की अग्निपरीक्षा, सामने दो रास्ते
शेख हसीना की वापसी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं. उनके सामने अब दो ही रास्ते हैं. पहला, क्या तारिक रहमान पुरानी दुश्मनी और बदले की आग में जलते हुए शेख हसीना को सीधा जेल में डालेंगे और किसी कंगारू कोर्ट के जरिए उन्हें फांसी के फंदे तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे? अगर ऐसा होता है, तो बांग्लादेश एक बार फिर भयंकर गृहयुद्ध और रक्तपात की आग में जल उठेगा.
दूसरा, लोकतंत्र की मजबूती का सबूत! क्या तारिक रहमान इस मौके का इस्तेमाल दुनिया के सामने यह साबित करने के लिए करेंगे कि बांग्लादेश में अब सच्चा लोकतंत्र है? क्या वे हसीना को एक विपक्षी नेता के तौर पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने का लोकतांत्रिक स्पेस देंगे? यह सिर्फ एक नेता की वापसी का मामला नहीं है, यह इस बात का लिटमस टेस्ट है कि पिछले दो सालों में तख्तापलट के बाद बना नया सिस्टम वास्तव में लोकतांत्रिक है या सिर्फ एक तानाशाही का दूसरा रूप सामने है.
अमेरिका की होगी पैनी नजर
शेख हसीना लगातार यह आरोप लगाती रही हैं कि उनकी सत्ता पलटने के पीछे अमेरिकी और पाकिस्तानी साजिश थी. अब जब वह भारत से वापस ढाका जाने की तैयारी कर रही हैं, तो वाशिंगटन की पेशानी पर बल पड़ना लाजमी है. अमेरिका की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या हसीना की वापसी से बांग्लादेश में चीन और पाकिस्तान का प्रभाव कम होगा? मौजूदा सत्ता हसीना के साथ कैसा सुलूक करती है? अगर हसीना के साथ कोई बर्बर या अलोकतांत्रिक व्यवहार होता है, तो क्या मानवाधिकारों का झंडा बुलंद करने वाला अमेरिका चुप रहेगा या कोई कड़ा कदम उठाएगा?
जमात बोली- क्या बीएनपी को फिर खड़ा करने की कोशिश
जमात-ए-इस्लामी के नायब-ए-अमीर अजहरुल इस्लाम ने सरकार से सवाल पूछा कि क्या बीएनपी अवामी लीग को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने संसद में कहा, आपने जमात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. मुझे बस एक बात पूछने दीजिए. मान लीजिए कि हम पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, तो उस खालीपन को कौन भरेगा? क्या आप अकेले देश चलाएंगे? क्या आप एकदलीय शासन स्थापित करना चाहते हैं? उस स्थान को कौन भरेगा? क्या आप अवामी लीग का पुनरुद्धार करने की कोशिश कर रहे हैं? मेरा मानना है कि आप अवामी लीग का पुनरुद्धार करने की कोशिश कर रहे हैं.