अतीत ऐसा कि खरोंच लग जाए तो भीड़, अब तो कब्र पर फूल तक नहीं, माफिया अतीक की ये कैसी दुर्दशा?

प्रयागराज: प्रयागराज और आस-पास के जिलों में आतंक का पर्याय रहे माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ मौत के घाट उतारे जा चुके हैं. दोनों की हत्या के बाद आतंक के एक युग का अंत हो चुका है. हालांकि, पुलिस अभी भी माफिया अतीक अहमद के करीबियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है. मगर, आज माफिया अतीक अहमद और अशरफ हत्याकांड की तीसरी बरसी है. आज के दिन ही 15 अप्रैल 2023 को माफिया अतीक अहमद और अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई थी. हत्या के बाद उनके शवों को उनके पैतृक कब्रिस्तान कसारी मसारी में दफनाया गया था. अब परिवार के ज्यादातर सदस्यों के जेल होने या फिर फरार होने की वजह से तीसरी बरसी के मौके पर अतीक और उसके भाई अशरफ की कब्र सूनी है. बदले हुए माहौल में दोनों की कब्र पर फूल चढ़ाने के लिए भी कोई नहीं पहुंच रहा है.

बेटा पहले ही मारा जा चुका था
अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या से 2 दिन पहले ही 13 अप्रैल को झांसी में माफिया का बेटा असद और शूटर गुलाम यूपी एसटीएफ के एनकाउंटर में मारा गया था. तीनों प्रयागराज के कसारी मसारी कब्रिस्तान में एक ही जगह पर दफनाए गए थे. यह माना जा रहा है कि पुलिस की खौफ की वजह से ही कोई यहां पर माफिया ब्रदर्स की बरसी पर उन्हें दो फूल चढ़ाने भी नहीं पहुंच रहा है.

गौरतलब है कि बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह रहे अधिवक्ता उमेश पाल व दो सरकारी गनर की 24 फरवरी 2023 की हत्या के बाद माफिया अतीक अहमद और अशरफ की हत्या हुई थी. जिस समय हत्या की गई थी धूमनगंज थाना पुलिस उन्हें कस्टडी में लेकर मेडिकल कराने काल्विन अस्पताल पहुंची थी. हालांकि मौके से ही पुलिस ने तीनों शूटर्स को गिरफ्तार कर लिया था. तीनों हत्यारोपी लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी सिंह फिलहाल जेल में बंद हैं.

हत्यारोपी जेल में बंद
तीनों हत्यारोपियों को पहले नैनी जेल से प्रतापगढ़ जेल भेजा गया था. जहां से बाद में उन्हें 18 नवंबर 2023 को सुरक्षा कारणों से चित्रकूट जेल भेज दिया गया. मौजूदा समय में दो हत्यारोपी चित्रकूट जेल और एक आगरा जेल में बंद हैं. माफिया अतीक अहमद और अशरफ हत्याकांड में 13 जुलाई 2023 को सीजेएम कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी. तीनों शूटर्स के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 120 बी, 419, 420, 467, 468 व आर्म्स एक्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी. इसके बाद 10 दिसंबर 2024 को हत्यारोपियों पर आरोप तय किया गया था.

आरोप तय होने के बाद माफिया अतीक अहमद और अशरफ मर्डर केस का जिला कोर्ट प्रयागराज में ट्रायल भी शुरू हो गया है. अब तक मुकदमे में कई तारीखें लग चुकी हैं. मगर, अभी तक गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं हो सके हैं. मुकदमे के पहले गवाह धूमनगंज थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश मौर्या की ही जिरह अब तक पूरी नहीं हुई है. किसी तारीख पर अधिवक्ता के उपलब्ध न होने तो किसी तारीख पर आरोपियों की जेल से पेशी ना होने के कारण सुनवाई टल रही है. हालांकि दो हत्यारोपियों ने अपनी ओर से अधिवक्ता गौरव सिंह को वकील नियुक्त किया है. जबकि तीसरे हत्यारोपी को अदालत ने राज्य के खर्चे पर अधिवक्ता मुहैया कराया है. हत्यारोपी सनी सिंह की ओर से एमिकस क्यूरी रत्नेश कुमार शुक्ला कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं. मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है.

कई लोग फरार
वहीं उमेश पाल व दो सरकारी गनर शूटआउट के बाद अतीक अहमद और अशरफ की हत्या की गई. उस हत्याकांड के कई आरोपी फरार हैं. माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन, अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और बहन आयशा नूरी फरार है. शाइस्ता परवीन पर 50 हजार और जैनब फातिमा व आयशा नूरी पर 25-25 हजार का इनाम घोषित है. वहीं उमेश पाल शूटआउट में शामिल बमबाज गुड्डू मुस्लिम, साबिर और अरमान बिहारी भी फरार है. तीनों आरोपियों पर 5-5 लाख का इनाम घोषित है. पुलिस फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है.

वहीं माफिया अतीक अहमद को तीन बार गिरफ्तार करने वाले रिटायर्ड आईजी लालजी शुक्ला का कहना है कि 1989 में अपने गुरु शौक ए इलाही उर्फ चांद बाबा की हत्या करने और विधायक बनने के बाद अतीक अहमद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उसने समाजवादी पार्टी के संस्थापक रहे मुलायम सिंह यादव का समर्थन किया और राजनीति से लेकर अपराध जगत में उसकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई. लगभग तीन दशक तक प्रयागराज और तब के इलाहाबाद में उसने हुकूमत की. हालांकि 24 फरवरी 2023 को बसपा विधायक राजू पाल की दवा उमेश पाल के साथ दो सरकारी गनर की हत्या के बाद उसके बुरे दिन शुरू हो गए. उसने योगी सरकार को खुली चुनौती दी. सीएम योगी ने विधानसभा में कहा कि माफिया को मिट्टी में मिला देंगे. इसके बाद उत्तर प्रदेश की पुलिस ने जो एक्शन लिया परिणाम सबके सामने है कि माफिया राज का अंत हो चुका है.