BMC Election: महाराष्ट्र की राजनीति में मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव को लेकर घमासान तेज हो गया है. करीब 74,000 करोड़ रुपये के विशाल बजट वाली बीएमसी जिसे कभी बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की सियासी पिच बनाकर खड़ा किया था अब ठाकरे परिवार के हाथ से फिसलती नजर आ रही है. भाजपा ने मुंबई में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है जिससे आगामी बीएमसी चुनाव उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है.
लगातार गिर रहा पार्टी का प्रदर्शन
बीएमसी लंबे समय तक अविभाजित शिवसेना का मजबूत गढ़ रही है. बालासाहेब ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना ने मुंबई की सत्ता पर दशकों तक दबदबा बनाए रखा. हालांकि, 2022 के बाद शिवसेना का विभाजन हुआ और उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) की स्थिति कमजोर होती चली गई. इसका असर विधानसभा और निकाय चुनावों में भी देखने को मिला जहां पार्टी का प्रदर्शन लगातार गिरा है. बता दें, अभी हाल ही में हुए निकाय चुनावों में भी उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखने में नाकाम रहे हैं. महाराष्ट्र में 288 निकायों में चुनाव हुए जिनमें से शिवसेना (यूबीटी) के खाते में सिर्फ 8 निकाय आए हैं. यह स्थिति पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि BMC चुनाव भी सिर पर है. दूसरी ओर, भाजपा ने मुंबई में संगठनात्मक मजबूती और आक्रामक रणनीति के जरिए अपनी पकड़ बढ़ाई है. भाजपा का दावा है कि बीएमसी के विशाल बजट का उपयोग बेहतर शहरी प्रशासन और पारदर्शिता के लिए किया जाएगा. यही वजह है कि पार्टी इस चुनाव को बेहद अहम मान रही है.
इस बीच, ठाकरे ब्रदर्स के राजनीतिक तालमेल को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे बीएमसी चुनाव में एक-दूसरे के करीब आ सकते हैं ताकि मुंबई में मराठी वोटों का बंटवारा रोका जा सके. हालांकि, सीट बंटवारे और रणनीति को लेकर अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. सूत्रों के मुताबिक, दोनों दलों के बीच 12 वार्डों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. खासकर सायन, वर्ली, भांडुप, विक्रोली और शिवड़ी जैसे महत्वपूर्ण इलाकों पर. इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तनातनी बनी हुई है और वे अपनी-अपनी दावेदारी से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
सीट शेयरिंग को लेकर सभी प्रक्रियाएं पूरी: संजय राउत
शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इस स्थिति पर कहा कि दोनों पक्षों को कार्यकर्ताओं की भावना समझने की जरूरत है और फिर एक साझा रास्ता निकालना पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि सीट शेयरिंग को लेकर सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और अब केवल आधिकारिक घोषणा बाकी है. खासकर पुणे, नासिक और मीरा भयंदर में दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल रही है.
राउत ने बताया कि ठाकरे बंधुओं की युति अब सुनिश्चित हो चुकी है और केवल इसकी औपचारिक घोषणा बाकी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महाविकास अघाड़ी का गठबंधन अभी तक टूटा नहीं है हालांकि कांग्रेस से बातचीत बंद हो चुकी है. उनके अनुसार, राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के संदर्भ में कुछ अलग रणनीतियां अपनानी पड़ती हैं जो आमतौर पर विधानसभा या लोकसभा चुनावों से भिन्न होती हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएमसी चुनाव केवल नगर निगम की सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत और ठाकरे परिवार के भविष्य की दिशा तय करेगा. यदि बीएमसी भी ठाकरे खेमे के हाथ से निकलती है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा.