चीन से आए घुमक्कड़ों ने खोला हिंदुस्तान का रहस्य! चौथी सदी में भी भारत करता था दुनिया पर राज

Ancient Chinese travellers: भारत के इतिहास की बात करें तो ये हमेशा से ही दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है. खासकर प्राचीन काल में भारत की संस्कृति, धर्म, शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था को समझने के लिए विदेशी यात्री यहां आते रहते थे. उनमें से सबसे चर्चित नाम चीन से आए तीन महान यात्रियों के हैं. फाह्यान, ह्वेनसांग और इत्सिंग, इन यात्रियों ने भारत के बारे में जो लिखा, वह आज भी प्राचीन भारत के गहरे रहस्यों को सुलझाने का काम करता है.

फाह्यान चौथी शताब्दी के यात्री
फाह्यान 399 ईस्वी के आसपास चीन से भारत आए थे. उनका मुख्य उद्देश्य था बौद्ध धर्म के ग्रंथों और अवशेषों को इकट्ठा करना. उन्होंने गुप्तकालीन भारत को करीब 10 साल तक बहुत करीब से देखा था. फाह्यान ने ने अपने किताब में लिखा था कि उस समय भारत समृद्ध, शांतिपूर्ण और धार्मिक वातावरण वाला देश था. उन्होंने उल्लेख किया कि समाज में अपराध बेहद कम थे और लोग कानून का पालन खुद से करते थे.

साथ ही इन्होंने ये भी लिखा था, कि भारत में शिक्षा और आध्यात्मिकता का स्तर बहुत ऊंचा था. फाह्यान की रचनाओं से पता चलता है कि भारत उस दौर में दुनिया की एक बड़ी सांस्कृतिक शक्ति था.

ह्वेनसांग
ह्वेनसांग सातवीं शताब्दी में भारत आए थे, और करीब 17 साल यहां रहे. ये नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए आए थे, और उन्होंने भारत की शिक्षा प्रणाली, प्रशासन और समाज के बारे में गहरी जानकारी दी थी. उन्होंने लिखा कि नालंदा उस समय दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र था, जहां हजारों छात्र दूर-दूर से पढ़ने आते थे. ह्वेनसांग ने सम्राट हर्षवर्धन के शासन की भी विस्तार से चर्चा की थी. उनकी रिपोर्ट्स से यह रहस्य खुलता है कि भारत ज्ञान, धर्म और राजनीति का संतुलित केंद्र था.

इत्सिंग
इत्सिंग की बात करें तो ये सातवीं शताब्दी में भारत आए थे. उन्होंने बौद्ध धर्म और भारतीय शिक्षा प्रणाली का गहन अध्ययन किया था. उन्होंने बताया कि नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों में हजारों भिक्षु और छात्र रहते थे. इत्सिंग ने भारत में बौद्ध भिक्षुओं के जीवन, उनके अनुशासन और अध्ययन के तरीके को विस्तार से लिखा था. उनकी रचनाओं से पता चलता है कि भारत न सिर्फ धार्मिक स्थल था बल्कि शिक्षा और शोध का भी गढ़ था.