ट्रंप की दादागीरी या मास्टरस्ट्रोक? ‘मुफ्त की सुरक्षा बंद, डील टूटी तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से डॉलर वसूलेगा अमेरिका

Guardian Angel Tax: मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है. ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान के साथ अंतिम शांति समझौता (Final Deal) विफल रहता है, तो अमेरिका सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों पर ‘टोल टैक्स’ लगा सकता है. ट्रंप ने इस संभावित शुल्क को मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा सेवाओं (Security Services) का भुगतान बताया है.

यह घटना ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान ने लेबनान में इजरायली हमलों के विरोध में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का एलान कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा मंडराने लगा है. हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत तय किए गए 60 दिनों के सीजफायर पीरियड के दौरान कोई टोल नहीं वसूला जाएगा.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान कोई टोल नहीं लगेगा. इसके बाद भी कोई टैक्स नहीं होगा, बशर्ते अंतिम डील पूरी हो जाए. लेकिन अगर डील फेल हुई, तो मध्य पूर्व के देशों को ‘गार्जियन एंजेल’ (रक्षक) के रूप में दी गई हमारी सेवाओं और खर्चों की भरपाई के लिए यह टोल हर हाल में लगाया जाएगा.

जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुंचे
इस ऐतिहासिक लेकिन नाजुक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कूटनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शनिवार शाम स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुके हैं, जहां वे ईरानी वार्ताकारों से आमने-सामने बात करेंगे. दूसरी ओर, ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित केंद्रीय बैंक और तेल मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों का एक बड़ा दल स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है.

इस बातचीत के केंद्र में सीजफायर के अलावा विदेशों में फ्रीज की गई अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों को बहाल करना भी शामिल है. ये बैठक पहले शुक्रवार को होनी थी, लेकिन लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते हमलों के कारण ईरान ने शुरू में पैर पीछे खींच लिए थे, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई. अमेरिकी और कतरी मध्यस्थों के भारी प्रयासों के बाद ईरान दोबारा मेज पर लौटने को राजी हुआ है. जाने से पहले वेंस ने उम्मीद जताई कि वे परमाणु वार्ता और दक्षिणी लेबनान में शांति बहाली को लेकर सकारात्मक नतीजों के साथ लौटेंगे.

वादे पूरे नहीं हुए तो पूरी डील खतरे में पड़ जाएगी: ईरान की दोटूक
भले ही बातचीत का मंच सज चुका हो, लेकिन ईरान का रुख अभी भी बेहद कड़ा है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ लफ्जों में कहा है कि जब तक अमेरिका और उसके सहयोगी अपने शुरुआती वादों को पूरा नहीं करते, तब तक अंतिम समझौते पर आगे बात नहीं होगी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय शर्तें पूरी नहीं की गईं, तो यह पूरा समझौता ही खतरे में पड़ जाएगा.

बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वर्चुअली बैठक कर एक व्यापक शांति समझौते का खाका तैयार किया था, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म करना, होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक स्थायी सहमति बनाना है. अब पूरी दुनिया की नजरें स्विट्जरलैंड में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं.