ट्रंप का खतरनाक बदला: इन 5 ‘दुश्मनों’ को अमेरिका में करवा दी ‘नो एंट्री’

EU Digital Services Act to threaten Elon Musk: अमेरिका ने पूर्व यूरोपीय यूनियन कमिश्नर थिएरी ब्रेटन और चार अन्य यूरोपीय नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध लगाकर एक नई जंग का ऐलान कर दिया है. यह जंग किस लेवल की होगी यह तो समय बताएगा लेकिन अभी तो सभी के मन में गुस्सा भरा हुआ है. तो चले जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है.

अमेरिका ने क्यों लगाया वीजा बैन?
रॉयटर्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने यूरोप के साथ डिजिटल जंग में बड़ा दांव खेला है. ट्रंप प्रशासन ने पूर्व EU कमिश्नर थिएरी ब्रेटन और चार अन्य यूरोपीय लोगों पर वीजा बैन लगा दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ये लोग “अमेरिकी विचारों को दबाने” के लिए संगठित कोशिशें कर रहे थे. ये टेक कंपनियों पर दबाव डालकर अमेरिकी बोलने की आजादी को कुचल रहे थे.

मामला क्या है?
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आरोप EU के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) से जुड़े हैं, जिसके तहत सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और हेट स्पीच को कंट्रोल किया जाता है. अमेरिका का कहना है कि DSA अमेरिकी कंपनियों और स्पीकर्स को निशाना बनाता है. खासकर ब्रेटन पर आरोप है कि उन्होंने एलन मस्क की कंपनी X (पूर्व ट्विटर) को धमकी दी थी. ये सब ट्रंप के इंटरव्यू से पहले हुआ था. इसको लेकर रूबियो ने X पर पोस्ट किया, “यूरोप के विचारधारा वाले लोग लंबे समय से अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स को मजबूर कर रहे हैं कि वो अमेरिकी विचारों को सजा दें. ट्रंप प्रशासन अब ये बर्दाश्त नहीं करेगा.”

ये 5 ‘दुश्मन’ कौन हैं, जिन्हें अमेरिका ने बैन किया?
वीजा बैन की लिस्ट में ये नाम हैं:थिएरी ब्रेटन (फ्रेंच, पूर्व EU कमिश्नर, DSA के मुख्य आर्किटेक्ट)
इमरान अहमद (ब्रिटिश, सेंटर फॉर काउंटरिंग डिजिटल हेट के CEO)
क्लेयर मेलफोर्ड (ब्रिटिश, ग्लोबल डिसइनफॉर्मेशन इंडेक्स की CEO)
जोसेफिन बैलॉन और अन्ना-लेना वॉन होडेनबर्ग (जर्मन, हेटएड संगठन की लीडर्स)

ये लोग ऑनलाइन हेट स्पीच और गलत जानकारी के खिलाफ काम करते हैं, लेकिन अमेरिका इन्हें “सेंसरशिप का कॉम्प्लेक्स” बता रहा है.

यूरोप ने क्यों मचाया हल्ला, मैक्रों भड़के
यूरोप में इस फैसले से बवाल मच गया है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे धमकी और जबरदस्ती बताया है, जो यूरोपीय डिजिटल संप्रभुता को कमजोर करने की कोशिश है. EU कमीशन ने कहा, “हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. DSA सभी पर बराबर लागू होता है और अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करता है. हम अमेरिका से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं और जरूरत पड़ी तो तेज जवाब देंगे.” ब्रेटन ने X पर लिखा, “मैकार्थी का विच हंट वापस आ गया? अमेरिकी दोस्तों, सेंसरशिप वहां नहीं है जहां आप सोच रहे हैं.” जर्मनी और फ्रांस ने भी इसे अस्वीकार्य बताया. पॉलिटिको और रॉयटर्स के मुताबिक, ये तनाव हाल ही में X पर EU के जुर्माने से बढ़ा है. अब आखिरी में जान लेते हैं. DSA कानून क्या है और विवाद क्यों?

DSA कानून क्या है और विवाद क्यों?
DSA यूरोप का बड़ा डिजिटल कानून है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को हानिकारक कंटेंट हटाने के लिए मजबूर करता है. हाल ही में EU ने एलन मस्क की X पर जुर्माना लगाया था, जिससे तनाव बढ़ा हुआ था. अमेरिका इसे फ्री स्पीच पर हमला मानता है, जबकि यूरोप कहता है कि ये सुरक्षित इंटरनेट के लिए जरूरी है. ये मामला US-EU रिश्तों में नया तनाव पैदा कर रहा है. जहां अमेरिका DSA को अमेरिकी टेक कंपनियों पर हमला बता रहा है. जबकि यूरोप कहता है कि ये इंटरनेट को सुरक्षित बनाता है.