स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक टैंकर पर हुए अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों की दुखद मौत हो गई है। इसके बाद भारत ने अमेरिकी राजदूत को तलब कर घटना को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अब अमेरिका इस हमले को लेकर अपनी सफाई दे रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमले से पहले जहाज को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन नाविकों ने इसे अनसुना किया। बता दें कि इस जहाज पर सवार 24 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे। इनमें से 21 को बचा लिया गया। हालांकि इंजन रूम में लगी आग के कारण 3 भारतीय नाविकों, आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश की मौत हो गई थी।
हमले के सप्ताहभर बाद एपी ने अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिकी सूत्रों के हवाले से बताया है कि पलाऊ के झंडे वाले इस शेडो फ्लीट टैंकर पर मिसाइल दागने से पहले अमेरिकी सेना ने 60 से ज्यादा मौखिक चेतावनियां दी थीं। अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अमेरिकी सेना पिछले दो हफ्तों से लगातार इस संदिग्ध जहाज को चेतावनी भेज रही थी। जहाज का पता चलते ही 9 जून की रात को अमेरिकी सैन्य विमानों ने इसे निशाने पर लिया।
अमेरिका का कहना है कि यह जहाज ईरान के शेडो फ्लीट का हिस्सा था, जो प्रतिबंधों को चकमा देकर अवैध रूप से ईरानी कच्चे तेल की तस्करी कर रहा था। अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत में जहाज को रोकने के लिए वार्निंग दी गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी विमानों ने पहले कुछ वार्निंग फायरिंग की। फिर हमला करने से ठीक 15 मिनट पहले क्रू को इंजन रूम खाली करने की चेतावनी दी। जब जहाज फिर भी नहीं रुका, तब अमेरिकी विमान से सीधे जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया। CENTCOM ने यह भी कहा है कि नाकेबंदी लागू हुए 60 से ज्यादा दिन हो गए थे और यह बात होनी चाहिए थी कि अमेरिका इसे सख्ती से लागू कर रहा है।
जयशंकर ने की रुबियो से बात
इससे पहले भारत ने अमेरिका के सामने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में अमेरिका के राजदूत जेसन मीक्स को तलब कर डिमार्श जारी किया है। वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात कर इस कार्रवाई को पूरी तरह से अनुचित बताया। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ”अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों में तीन भारतीय नाविक के मारे जाने पर भारत के कड़े विरोध को दोहराया।” उन्होंने कहा, “वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस तरह का घातक हमला उचित नहीं है।”
राहुल गांधी ने उठाए सवाल
इस बीच कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए रविवार को कहा कि ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ एक ‘आज्ञाकारी नौकर’ की तरह सुनते हैं और ”आदेशों” का पालन करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद, न अफसोस, न माफी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है।” उन्होंने कहा, ”उनके शब्द पढ़िए, ‘अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।’ कोई उल्लंघन ‘बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’।” कांग्रेस सांसद ने कहा, ”एक आजाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा लेकिन हमारे ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ चुप हैं। वह एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं और आदेश मान लेते हैं। कोई ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वह उन्हीं के वश में हैं।”