Pakistan : भारत में इन दिनों ‘धुरंधर’ नाम की फिल्म चर्चा में है, इसमें एक जासूस दुश्मन देश में घुसकर आतंकियों का सफाया करता है. यह कहानी भले ही पर्दे की हो लेकिन इसी के बीच एक ऐसा सच सामने आ रहा है, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगता. पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों से लगातार ऐसे हमले हो रहे हैं, जिनमें बड़े-बड़े आतंकी चेहरे ‘अज्ञात हमलावरों’ के निशाने पर हैं. कोई बाइक सवार आता है गोली चलती है और फिर गायब हो जाता है. न कोई दावा, न कोई जिम्मेदारी. यही रहस्य इस कहानी को और गहरा बनाता है. सवाल उठता है कि क्या वाकई कोई ‘धुरंधर’ है, जो चुन-चुनकर इन आतंकियों को खत्म कर रहा है? लश्कर-ए-तैयबा का सह-संस्थापक और आतंकी अमीर हमजा पर गुरुवार को हमला हुआ. इसके बाद ये सवाल एक बार फिर जिंदा हो गए.
यह सिलसिला अब इतना लंबा हो चुका है कि इसे महज इत्तेफाक नहीं कहा जा सकता. लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े कई बड़े नाम अचानक मारे जा रहे हैं. कभी लाहौर, कभी कराची, तो कभी पीओके हर जगह एक जैसी वारदात. पाकिस्तान की एजेंसियां भी अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दे पाई हैं. यही वजह है कि ‘अज्ञात बंदूकधारी’ अब एक रहस्य बन चुके हैं, जिनकी पहचान से ज्यादा उनके निशाने चर्चा में हैं.
‘अज्ञात बंदूकधारी’ का रहस्य, पाकिस्तान में दहशत
पिछले 2-3 सालों में पाकिस्तान में जिस तरह से आतंकी संगठनों के बड़े चेहरे मारे गए हैं, उसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है. हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आमिर हमजा पर लाहौर में हमला हुआ. बाइक सवार हमलावरों ने गोलियां चलाईं और फरार हो गए. इससे पहले भी कई बड़े नाम इसी तरह निशाना बनाए गए. खास बात यह है कि इन हमलों का तरीका लगभग एक जैसा है करीब से फायरिंग और तुरंत फरार. इससे यह संकेत मिलता है कि यह काम किसी संगठित नेटवर्क द्वारा किया जा रहा है.
इन घटनाओं ने पाकिस्तान के भीतर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह आतंकी संगठनों के बीच आपसी टकराव है या कोई बाहरी ताकत सक्रिय है? अभी तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है. लेकिन एक बात साफ है कि जिन लोगों को निशाना बनाया गया, वे सभी भारत में वांटेंड या आतंक से जुड़े रहे हैं.
पाकिस्तान में लगातार हो रही इन हत्याओं ने सुरक्षा तंत्र की पोल खोल दी है. कई मामलों में पुलिस सिर्फ ‘अज्ञात हमलावर’ कहकर मामला बंद कर देती है. इससे यह भी संकेत मिलता है कि या तो जांच कमजोर है या फिर सच्चाई को दबाया जा रहा है. इन हमलों के पीछे कौन है यह अब तक एक बड़ा सवाल बना हुआ है.
2023 में इन घटनाओं में अचानक तेजी आई थी, जब कुछ ही महीनों में कई बड़े आतंकी मारे गए. इसके बाद 2024 और 2025 में भी यह सिलसिला जारी रहा. इससे यह साफ है कि यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं, बल्कि एक पैटर्न बन चुका है.
अब तक किन-किन आतंकियों को ‘अज्ञात’ ने ठोका?
मिस्त्री जाहूर इब्राहिम (2022): IC-814 हाईजैकिंग से जुड़ा नाम. कराची में मारा गया. लंबे समय से वांछित था और कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा.
अबू कताल सिंधी (2023): लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य. झेलम क्षेत्र में गोली मारकर हत्या. हाफिज सईद का करीबी माना जाता था.
शाहिद लतीफ (2023): पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड. सियालकोट में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या की.
मुफ़्ती कैसर फारूक (2023): हाफिज सईद का सहयोगी. कराची में धार्मिक स्थल के पास हमला हुआ, बाद में अस्पताल में मौत.
परमजीत सिंह पंजर (2023): खालिस्तान कमांडो फोर्स का प्रमुख. लाहौर में वॉक के दौरान गोली मार दी गई.
अकरम खान गाजी (2023): लश्कर का कमांडर. नवंबर 2023 में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया.
ख्वाजा शाहिद (2023): पीओके में सक्रिय लश्कर कमांडर. अपहरण के बाद सिर कटा शव मिला.
मुहम्मद ताहिर अनवर (2025): मसूद अजहर का भाई. संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, कई ऑपरेशनल गतिविधियों से जुड़ा था.
आमिर हमजा (2026 – घायल): लश्कर का संस्थापक सदस्य. लाहौर में गोलीबारी में घायल, इलाज जारी.