दिल्ली नगर निगम (MCD) के 12 वार्डों पर हुए उपचुनाव के नतीजे बुधवार को घोषित कर दिए गए. इन नतीजों ने एक बार फिर बीजेपी (BJP) का पलड़ा भारी रखा है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े को लेकर सस्पेंस अब भी बरकरार है.
बुधवार को आए नतीजों के मुताबिक, बीजेपी ने 7 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) को 3 सीटों से संतोष करना पड़ा. वहीं, कांग्रेस और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने 1-1 सीट पर कब्जा जमाया है.
वोट प्रतिशत से समझिए कौन मार गया बाजी?
BJP की बढ़त: बीजेपी ने सबसे ज्यादा 45.09% वोट हासिल किए, जो उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी ‘आप’ (AAP) से लगभग 10% ज्यादा है.
AAP का प्रदर्शन: आम आदमी पार्टी को 34.97% वोट मिले, जो 2022 के एमसीडी चुनावों की तुलना में गिरावट दर्शाता है.
कांग्रेस की स्थिति: कांग्रेस ने 13.44% वोट शेयर के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और एक सीट (संगम विहार-ए) जीतने में कामयाब रही.
कुल मतदान: इन उपचुनावों में कुल 38.51% मतदान (Voter Turnout) हुआ था, जो 2022 के आम एमसीडी चुनावों (50.47%) की तुलना में काफी कम रहा.
सबका दावा जीत का
बीजेपी: जनता का भरोसा कायम
मेयर और बीजेपी पार्षद राजा इकबाल सिंह ने इन नतीजों को जनता के विश्वास की जीत बताया. उन्होंने कहा, हमने 7 सीटें जीती हैं जो दर्शाता है कि दिल्ली के लोगों का भरोसा भगवा पार्टी पर कायम है. हम जनता के लिए और अधिक मेहनत करेंगे. बीजेपी पार्षदों का मानना है कि उनके पास सदन चलाने और स्टैंडिंग कमेटी के जरिए फैसले लेने के लिए पर्याप्त संख्याबल है.
AAP: बीजेपी के गढ़ में सेंध
विपक्ष के नेता और आप पार्षद अंकुश नारंग ने इन नतीजों को अपनी पार्टी के लिए उत्साहजनक बताया. उन्होंने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा, बीजेपी ने अपने सभी बड़े चेहरों, यहां तक कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसदों को प्रचार में उतार दिया था, इसके बावजूद वे अपनी दो मजबूत सीटें हार गए.
IVP: दोनों पार्टियों का ग्राफ गिरा
इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) के नेता मुकेश गोयल ने एक अलग ही विश्लेषण पेश किया. उन्होंने कहा, इन नतीजों से एमसीडी के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि बीजेपी के पास पहले से नंबर हैं. लेकिन यह दिखाता है कि बीजेपी और आप दोनों का ग्राफ गिरा है क्योंकि दोनों ने अपने-अपने गढ़ (Strongholds) खोए हैं.
क्या निगम के कामकाज पर असर पड़ेगा?
पार्षदों और जानकारों का मानना है कि इन नतीजों का एमसीडी की दिन-प्रतिदिन की कार्यप्रणाली पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.भले ही बीजेपी 126 के पूर्ण बहुमत से दूर है, लेकिन 123 सीटों के साथ वह सबसे बड़ी पार्टी है और सदन में उसकी स्थिति बेहद मजबूत है.निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के समीकरणों को देखते हुए बीजेपी को फैसले लेने में ज्यादा दिक्कत नहीं आने वाली है.