राजस्थान में भक्ति का अनोखा स्वरूप, सांवरिया सेठ का चांदी का आधार कार्ड

Bhilwara News: भीलवाड़ा राजस्थान की मेवाड़ भूमि, जहां भक्ति और कला का अनूठा संगम है, वहां से एक हृदयस्पर्शी खबर आई है. प्रसिद्ध आराध्य श्री सांवरिया सेठ के प्रति भक्त की अटूट श्रद्धा ने एक नई मिसाल कायम की है. भीलवाड़ा जिले के आसींद कस्बे में स्थानीय स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने भगवान सांवरिया सेठ के लिए शुद्ध चांदी से ‘आधार कार्ड’ तैयार किया है. यह कार्ड न केवल शिल्प की उत्कृष्टता दर्शाता है, बल्कि भक्त की गहरी आस्था को भी प्रतिबिंबित करता है. क्षेत्र में इस अनोखे कार्ड की चर्चा जोरों पर है, जो श्रद्धा और आधुनिकता का मेल है.

आधार कार्ड की विशेषताएं
यह विशेष आधार कार्ड पूरी तरह शुद्ध चांदी से बनाया गया है, जिसमें लगभग 60 ग्राम चांदी का उपयोग हुआ है. डिजाइन भारत सरकार के आधिकारिक आधार कार्ड की तर्ज पर है, जिसमें ऊपर भारत का राजचिह्न अशोक स्तंभ अंकित है. कार्ड पर सांवरिया सेठ की आकर्षक तस्वीर के साथ उनकी पूरी जानकारी दी गई है.

नाम ‘सांवरिया सेठ’, लिंग ‘पुरुष’ और जन्म तिथि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 3112 ईसा पूर्व (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) के रूप में दर्ज है. कार्ड के नीचे लिखा है – “मेरे सरकार मेरी पहचान”, जो भक्त की भावना को व्यक्त करता है. यह कार्ड एक स्थानीय ग्राहक की विशेष मांग पर मात्र दो दिनों में तैयार किया गया, जो कलाकार की कुशलता को दर्शाता है.

भक्ति से प्रेरित रचनाएं
स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने बताया, “ग्राहकों की आस्था के अनुसार हम सांवरिया सेठ के नाम से सोना-चांदी के विशेष आइटम बनाते हैं. यह आधार कार्ड भी भक्त की भावना से प्रेरित है. पहले हम कार, मकान, दुकान, तुलसी का पौधा, मोबाइल कवर और कड़े जैसे कई आइटम सांवरिया सेठ के नाम पर तैयार कर चुके हैं.” सोनी का कहना है कि ऐसे रचनात्मक कार्य भक्ति को आधुनिक रूप देते हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं. आसींद में उनकी दुकान पर ऐसे अनोखे आइटम की मांग बढ़ रही है, जो स्थानीय कला को बढ़ावा दे रही है.

आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र
यह अनोखा चांदी का आधार कार्ड आसींद और आसपास के इलाकों में खासा आकर्षण का केंद्र बन गया है. स्थानीय लोग इसे भक्ति की नई अभिव्यक्ति मान रहे हैं. कई भक्तों ने कहा कि यह कार्ड सांवरिया सेठ की सर्वव्यापकता को दर्शाता है, जो आधुनिक जीवन में भी उनकी पहचान बनाता है.

क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली यह घटना सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है, जहां लोग कलाकार की सराहना कर रहे हैं. मेवाड़ की भक्ति परंपरा में यह एक नया अध्याय जोड़ रही है, जो कला के माध्यम से आस्था को जीवंत बनाती है.