Rajasthan AI News: राजस्थान में अब अपराधी या परीक्षा में बैठा डमी कैंडिडेट सिर्फ नाम या दस्तावेज़ बदलकर नहीं बच पाएगा. क्योंकि अब पहचान होगी चेहरे से और वो भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए. सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने एडवांस्ड फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए ऐसी तकनीक लागू की है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी अभ्यर्थियों से लेकर आदतन अपराधियों तक की पहचान मिनटों में कर सकती है. 50 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड हों या लाखों आपराधिक तस्वीरों का डेटाबेस अब संदिग्ध चेहरे सीधे एआई की नजर में होंगे. इतना ही नही ये तकनीक लावारिस शवों की पहचान कर परिजनों तक पहुंचाने में भी मददगार साबित हो रही है.
भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट की बढ़ती घटनाओं से लेकर आदतन अपराधियों की पहचान और लावारिस शवों की शिनाख्त जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए राजस्थान सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम लागू किया है.
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग द्वारा विकसित यह कंप्यूटर विजन आधारित तकनीक अब शासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक प्रभावी टूल साबित हो रही है. प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थियों की पहचान के लिए विकसित इस एआई एप्लिकेशन के जरिए संदिग्ध परीक्षार्थियों के फोटो का पंजीकृत अभ्यर्थियों के करीब 50 लाख रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है.
उच्च-सटीकता वाले फेस मैचिंग के माध्यम से संभावित डमी कैंडिडेट्स के मामलों की पहचान में एजेंसियों को सफलता मिली है. इससे भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूती मिलने लगी है.
डीओआईटी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग के लिए एक अलग फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम भी तैनात किया है. इसके जरिए संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरों का करीब 10 लाख फोटो वाले आपराधिक डेटाबेस से मिलान संभव है. इससे बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों की पहचान और निगरानी में जांच एजेंसियों को तेजी मिल रही है.
वहीं मानवीय पहल के तहत इस तकनीक का उपयोग अब लावारिस शवों की पहचान के लिए भी किया जा रहा है. अज्ञात शवों के फोटो को गुमशुदा व्यक्तियों एवं अन्य उपलब्ध डेटाबेस से मिलान कर उनकी पहचान आसान बनाई जा रही है, जिससे परिजनों तक सूचना पहुंचाने में सहायता मिल रही है. विभाग के अनुसार सभी एआई एप्लिकेशन राजस्थान स्टेट डेटा सेंटर में एयर-गैप्ड वातावरण में संचालित किए जा रहे हैं.
इनमें ऑडिट लॉगिंग, ट्रेसबिलिटी और डेटा गोपनीयता के आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ हो सके. राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह के एआई-आधारित नवाचार सुशासन को मजबूत करने के साथ ही सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
बहरहाल,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से राजस्थान में अब पहचान ही जांच की नई कुंजी बनती जा रही है जहां तकनीक के सहारे डमी अभ्यर्थियों पर शिकंजा कस रहा है, अपराधियों की तलाश तेज हो रही है और लावारिस शवों को भी मिल रही है उनकी पहचान.