सरकारी के साथ अब प्राइवेट स्कूलों के स्टूडेंट्स का भी होगी सेहत की जांच, रखेंगे डिजिटल रिकॉर्ड

जयपुर: शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों के छात्रों के साथ ही प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों का भी स्वास्थ्य परीक्षण कराएगा. सत्र 2024-25 के चिह्नित विद्यार्थियों को आई टेस्ट कर चश्मा वितरण के काम में गति और छात्रों के रिकॉर्ड के साथ स्वास्थ्य रिकॉर्ड को भी ऑनलाइन इंटीग्रेट करने के निर्देश दिए. सभी सीबीईओ को सर्वे में सर्जरी के लिए चिह्नित छात्रों के स्वास्थ्य की निगरानी के साथ 10 अक्टूबर तक वेरीफिकेशन रिपोर्ट निदेशालय भेजने के निर्देश दिए.

हाल में राजस्थान के स्कूल शिक्षा विभाग को शिक्षा क्षेत्र में डिजिटली शाला स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रतिष्ठित गोल्ड स्कॉच अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया था. राजस्थान देश का पहला राज्य है, जिसने स्कूल स्तर पर हेल्थ चेकअप को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा. अब इस नवाचार को सरकारी स्कूलों के साथ प्राइवेट स्कूलों में शुरू करने की तैयारी है. इस संबंध में सोमवार को स्कूल शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि अब न केवल सरकारी बल्कि प्राइवेट स्कूलों के बच्चों का भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा. इससे बच्चों की सेहत संबंधी समस्याएं समय रहते पहचान में आ सकेंगी. सत्र 2024-25 में जिन विद्यार्थियों को दृष्टि संबंधी दिक्कतें पाई हैं, उनके लिए आई टेस्ट और चश्मा वितरण की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है, ताकि वे बिना परेशानी के पढ़ सकें.

प्रगति के साथ सेहत पर नजर: शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि छात्रों की शैक्षणिक जानकारी के साथ स्वास्थ्य रिकॉर्ड को ऑनलाइन जोड़ने से उनकी प्रगति और सेहत दोनों पर एकसाथ नजर रखी जा सकेगी. जिन बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता है, उनकी सेहत पर लगातार निगरानी और वेरीफिकेशन रिपोर्ट 10 अक्टूबर तक निदेशालय भेजने की जिम्मेदारी सीबीईओ को दी है. इससे बच्चों को समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी.

फिर मांगी जर्जर विद्यालय भवनों की सूची: शासन सचिव ने जर्जर विद्यालय भवन और बारिश के चलते जर्जर हुए भवनों की सूचना विभाग भेजने के निर्देश दिए ताकि आपदा राहत के तहत ऐसे स्कूलों के लिए बजट की राज्य सरकार से मांग की जा सके. उन्होंने अधिकारियों से प्रखर राजस्थान 2.0, एफएलएन, शाला संबलन, शाला स्वास्थ्य परीक्षण, 1 अक्टूबर को प्रस्तावित स्वच्छता सेवा अभियान, स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग, छात्रवृत्ति भुगतान आदि की वर्तमान स्थिति पर बात की. उन्होंने विभाग की योजनाओं से छात्रों तक लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करने, योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए विद्यालयों के दौरे और आंकड़ों के लिए शाला संबलन एप का इस्तेमाल करने पर जोर दिया.

स्वास्थ्य सेवा अभियान में सामुदायिक सहभागिता के साथ बच्चों की भी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि शाला संबलन एप पर जिओ टैगिंग से ऐसी व्यवस्था की है, जिससे कोई भी अधिकारी संबंधित विद्यालय में पहुंच कर ही अपने लॉगिन आईडी से डाटा एंट्री कर पाएगा. उन्होंने प्रखर राजस्थान 2.0 के अंतर्गत ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (DEAR)’ को ध्यान में रखते हुए बच्चों की रीडिंग कैपेसिटी के विकास पर ध्यान देने के लिए कहा.

कक्षा 1-2 के लिए एफएलएन कार्यक्रम : शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा 1 और 2 के बच्चों में बुनियादी शिक्षा और साक्षरता ज्ञान (एफएलएन) के लिए 7 अक्टूबर से 7 फरवरी तक कार्यक्रम चलाया जाएगा. इसमें बच्चों को निर्धारित मापदंडों तक पहुंचाने का काम किया जाएगा.