‘फॉर्मर रजिस्ट्री’ के चक्कर में उलझे किसान, बारिश की मार के बाद अब कागजी पेच!

कानपुर देहात: कानपुर देहात में बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल को हुए नुकसान के बाद अब किसानों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है. सरकार द्वारा गेहूं खरीद के लिए “फॉर्मर रजिस्ट्री” को अनिवार्य किए जाने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं. इसी मुद्दे की जमीनी हकीकत जानने के लिए जी मीडिया की टीम ने अकबरपुर स्थित क्रय केंद्र का दौरा कर रियलिटी चेक किया.

फॉर्मर रजिस्ट्री जरूरी
क्रय केंद्र पर मौजूद खरीद अधिकारी आराधना गिरी ने बताया कि जिले में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन इस बार प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. उन्होंने कहा कि पहले जहां सिर्फ पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के आधार पर गेहूं खरीदा जाता था, वहीं अब “फॉर्मर रजिस्ट्री” कराना अनिवार्य कर दिया गया है. बिना फॉर्मर रजिस्ट्री के किसी भी किसान का गेहूं नहीं खरीदा जाएगा.

बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी
अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की मंशा इस नई व्यवस्था के जरिए खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है. इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और किसानों को उनकी उपज का सीधा लाभ मिल सकेगा. साथ ही किसानों के मुनाफे में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, जमीनी स्तर पर किसानों को इस नई व्यवस्था को समझने और पूरा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

किसानों को जागरूक किया जा रहा
कई किसानों का कहना है कि उन्हें फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है, वहीं कुछ किसानों को तकनीकी समस्याओं और दस्तावेजों की कमी के चलते दिक्कतें आ रही हैं. किसानों का यह भी कहना है कि फसल पहले ही बारिश से प्रभावित हो चुकी है, ऐसे में अतिरिक्त औपचारिकताएं उनके लिए और परेशानी खड़ी कर रही हैं. वहीं प्रशासन का दावा है कि जल्द ही सभी किसानों को जागरूक कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा. अब देखना होगा कि सरकार की यह नई पहल किसानों को कितना राहत देती है या फिर उनकी मुश्किलों को और बढ़ाती है.