सीकर. किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. राज्य सरकार अब रासायनिक मुक्त खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को आर्थिक सहयोग देने जा रही है. गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के तहत सरकार अब वर्मी कंपोस्ट यूनिट (केंचुआ खाद इकाई) लगाने पर किसानों को ₹10,000 प्रति यूनिट का अनुदान देगी.
रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से न केवल मिट्टी की सेहत पर बुरा असर पड़ा है, बल्कि इंसानों के स्वास्थ्य पर भी इसका दुष्प्रभाव देखा जा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अब जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और उपभोक्ताओं को स्वस्थ अनाज मिल सके.
सीकर में 1500 यूनिट लगाने का लक्ष्य
सीकर जिला कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक शिवजीराम कटारिया ने बताया कि जिले में किसानों के लिए डेढ़ हजार वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने का लक्ष्य तय किया गया है. उन्होंने बताया कि किसान पशु अपशिष्ट, गोबर और घरेलू जैविक कचरे से प्राकृतिक खाद तैयार कर सकते हैं. इससे मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ेगी और उत्पादन की गुणवत्ता भी सुधरेगी.
उन्होंने कहा कि फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि अधिक से अधिक किसानों तक इस योजना की जानकारी पहुंचाई जाए. विभाग की मंशा है कि खेतों में रासायनिक खादों का उपयोग घटाकर प्राकृतिक जैविक खादों का इस्तेमाल बढ़ाया जाए, जिससे किसान और उपभोक्ता दोनों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़े. यह योजना किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी.
कैसे मिलेगा अनुदान: आवेदन प्रक्रिया
इस योजना के तहत अनुदान प्राप्त करना सरल है, लेकिन कुछ शर्तों का पालन करना होगा. किसानों को राजस्थान सरकार के “मित्र पोर्टल” पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा.
स्वीकृति का आधार: आवेदन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर स्वीकृत किए जाएंगे.
पात्रता शर्तें: लाभ पाने के लिए किसान के पास कम से कम 6 माह पुरानी जमाबंदी (जमीन का रिकॉर्ड) और तीन गोवंश होना आवश्यक है. इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुदान सही और जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे.
क्या है वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद)?
वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) जैविक पदार्थों को केंचुओं द्वारा पचाने के बाद बनता है. लगभग डेढ़ से दो महीने में यह खाद तैयार हो जाती है. इसका रंग हल्का काला और बनावट दानेदार होती है. यह पौधों को पोषण देने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाता है. वर्मी कंपोस्ट की सबसे बड़ी खासियत है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक और रसायन-मुक्त होती है, जिसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को अच्छा मूल्य दिला सकती है.