ट्रेड लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी: 10 हजार से ज्यादा कारोबारियों पर अतिरिक्त भार

जयपुर: राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग की ओर से करीब नौ साल बाद ट्रेड लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, जिम, और अन्य कारोबारियों को रास नहीं आ रही. नए आदेश के अनुसार कई श्रेणियों में लाइसेंस शुल्क दो से पांच गुना तक बढ़ा दिया गया है. इसका सीधा भार प्रदेशभर के 10 हजार से ज्यादा व्यावसायियों की जेब पर पड़ेगा, जिस व्यापारी वर्ग में नाराजगी है. ऐसे में अब सरकार के इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठाई जा रही है.

मुश्किल दौर में अतिरिक्त बोझ: फेडरेशन ऑफ होटल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र लुनिवाल ने कहा कि सरकार ने ऐसे समय में लाइसेंस शुल्क बढ़ाया है जब होटल और पर्यटन उद्योग कई चुनौतियों से जूझ रहा है. गैस सिलेंडर महंगे हो गए हैं, पर्यटकों की संख्या कम है और गर्मी के कारण घरेलू पर्यटन भी प्रभावित हुआ है. ऐसे में ट्रेड लाइसेंस शुल्क को दो से तीन गुना नहीं बल्कि कई मामलों में चार से पांच गुना तक बढ़ा देना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट संचालक पहले से आयकर, जीएसटी, यूडी टैक्स सहित कई प्रकार के करों का भुगतान करते हैं. इसके बावजूद ट्रेड लाइसेंस के नाम पर अलग शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि इसके बदले कोई विशेष सुविधा नहीं मिलती. उन्होंने कहा कि इस संबंध में स्वायत्त शासन मंत्री, विभागीय सचिव और वित्त विभाग को ज्ञापन दिया जाएगा.

ट्रेड लाइसेंस अब राजस्व का माध्यम बन गया: लुनिवाल में आरोप लगाया कि वर्षों पहले ट्रेड लाइसेंस शुल्क केवल नाममात्र का हुआ करता था और इसका उद्देश्य शहर में संचालित प्रतिष्ठानों का रिकॉर्ड रखना था, लेकिन अब इसे स्थानीय निकायों के लिए राजस्व जुटाने का माध्यम बना दिया गया है.

व्यापार महासंघ ने भी जताई नाराजगी: उधर, जयपुर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल ने भी शुल्क वृद्धि का विरोध करते हुए कहा कि ये फैसला मनमाना है. उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार करों का बोझ कम करने की दिशा में कदम उठा रही है, वहीं राजस्थान में व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है. गोयल ने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट संचालक पहले ही कई प्रकार के कर और लाइसेंस शुल्क जमा कर रहे हैं. ऐसे में ट्रेड लाइसेंस की आवश्यकता और उसके बढ़े हुए शुल्क पर पुनर्विचार होना चाहिए. उन्होंने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग के लिए ‘सिंगल लाइसेंस सिस्टम’ लागू करने की मांग भी उठाई.

बहरहाल, ट्रेड लाइसेंस शुल्क में की गई इस बड़ी बढ़ोतरी ने सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच नए विवाद को जन्म दे दिया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि व्यापारिक संगठनों के विरोध और ज्ञापनों के बाद सरकार ट्रेड लाइसेंस फीस में कोई राहत देती है या फिर नए दरों को यथावत लागू रखा जाता है.