जयपुर। राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य के करीब 8 लाख कर्मचारी, अधिकारी और जनप्रतिनिधि अब सरकार के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हालिया संकेतों के बाद माना जा रहा है कि राज्य में तबादला नीति पर जल्द बड़ा फैसला लिया जा सकता है और तबादलों पर लगी रोक हट सकती है।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में 10 जून के बाद तबादलों को लेकर निर्णय के संकेत दिए थे, जिसके बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल बढ़ गई है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि गर्मी की छुट्टियों के दौरान तबादले खोले जाते हैं तो इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को काफी राहत मिलेगी, खासकर बच्चों की पढ़ाई पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक दो बार सामान्य तबादले खोले जा चुके हैं। पहली बार 10 से 22 फरवरी 2024 के बीच सभी विभागों, निगमों और बोर्डों में तबादलों की अनुमति दी गई थी। दूसरी बार 1 से 15 जनवरी 2025 के दौरान अधिकांश विभागों में तबादले हुए, हालांकि शिक्षा से जुड़े कई विभागों में प्रतिबंध जारी रहा। इसके अलावा 8 मई से 30 जून 2025 के बीच सीमा से सटे जिलों में रिक्त पदों को भरने के लिए विशेष छूट के तहत तबादले किए गए।
हाल ही में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भी संकेत दिए थे कि शिक्षकों के तबादले मुख्यमंत्री के निर्देशों पर ही निर्भर करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में व्याख्याताओं और प्राचार्यों के तबादले पहले ही हो चुके हैं, इसलिए फिलहाल उन पर दोबारा विचार की आवश्यकता नहीं है। हालांकि थर्ड ग्रेड शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के तबादलों पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पूर्व में आमतौर पर तबादले गर्मी की छुट्टियों में किए जाते रहे हैं, जिससे परिवारों को स्थिरता और सुविधा मिलती है। बीच सत्र में तबादलों से कर्मचारियों को कई प्रकार की प्रशासनिक और व्यक्तिगत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी हैं। यदि सरकार तबादलों की खिड़की खोलती है, तो यह लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है और प्रशासनिक व्यवस्था में भी नई हलचल देखने को मिलेगी।