Rajasthan Crime : तस्करों के बदलते तौर-तरीके, मजबूत नेटवर्क और बिचौलियों की भूमिका ने प्रदेश में शराब के अवैध कारोबार को संगठित अपराध का रूप दे दिया है। हालात ये हैं कि मामले दर्ज होने और गिरफ्तारियां बढ़ने के बावजूद मुख्य तस्कर पर्दे के पीछे ही हैं। इससे इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
प्रदेश में पुलिस की दबिश, ऑपरेशन गुप्त और प्रहार लगातार चल रहे हैं। ट्रक-टैंकर जब्त हो रहे हैं और ड्राइवर-खलासी सलाखों के पीछे जा रहे हैं। फिर भी शराब तस्करी बदस्तूर जारी है। सरगना अब भी पकड़ से दूर हैं। चावल के कट्टों से लेकर गैस टैंकर तक हर बार नई चाल और हर बार पुलिस की अधूरी पकड़।
करोड़ों की अवैध शराब जब्त होने के बावजूद असली मालिकों का नाम तक सामने नहीं आता। यही इस संगठित अपराध की सबसे बड़ी ताकत बनता जा रहा है। अकेले पाली में ही इस वर्ष में 456 मामलों में 461 लोग पकड़े। इनमें अधिकतर ड्राइवर और खलासी ही थे। सिरोही में 478 कार्रवाइयों में 501 लोग पकड़े गए। इनमें भी ज्यादातर किराए के लोग ही शामिल थे।
इसलिए नहीं टूट पाती चेन…
जांच एजेंसियों के अनुसार तस्कर ड्राइवरों को केवल सफर तय करने के लिए रखते हैं। शराब भरने और खाली करने का काम बिचौलिए करते हैं। इस कारण चालक सप्लायर से सीधे नहीं मिलते, जिससे चेन टूट नहीं पाती। पंजाब-हरियाणा निर्मित शराब पश्चिमी राजस्थान के रास्ते गुजरात भेजी जा रही है, जहां प्रतिबंध के कारण इसका बड़ा अवैध बाजार है। सिरोही पुलिस इस वर्ष अब तक पौने चार करोड़ की शराब जब्त कर चुकी है। लगातार दबिशों के बावजूद तस्करों तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।