सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में कृषि विभाग की टीम और स्थानीय बीज व्यापारियों के बीच शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मोड लेने लगा है। दरअसल सीकर के सांवली रोड पर हुई झड़प, राजकार्य में बाधा और व्यापारियों द्वारा विभागीय टीम पर लगाए गए 20 लाख रुपए की रिश्वत के आरोपों पर अब प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। इस पूरे विवाद पर उन्होंने बेहद तीखी और गंभीर प्रतिक्रिया दी है।
मंत्री किरोड़ी ने कहा भ्रष्टाचार साबित हुआ पद छोड़ने दूंगा
कृषि मंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर भारतीय जनता पार्टी राजस्थान और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को टैग करते हुए व्यापारियों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ किया कि उनकी टीम किसी गलत काम में लिप्त नहीं थी, बल्कि गरीब किसानों की फसलों को नकली बीजों से बचाने के लिए अपनी ड्यूटी निभा रही थी। डॉ. मीणा ने लिखा, ‘नकली बीज माफियाओं के खिलाफ हमारी टीम ने पूरी निष्ठा से कार्रवाई की। झूठे आरोप लगाकर किसानों की लड़ाई को कमजोर नहीं किया जा सकता। यदि भ्रष्टाचार का एक भी आरोप सिद्ध हो जाए तो मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन किसानों के हितों से समझौता कभी नहीं होगा।’
क्या था पूरा मामला, जानिए
इस विवाद की शुरुआत 4 जून को सीकर के सांवली चौराहे के पास और बीकानेर बाईपास पर स्थित ‘विकास सीड्स’ व ‘बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज’ के गोदामों से हुई थी। कृषि विभाग के कर्मचारी संदीप कुमार और रजनीश कुमार एक गोपनीय सूचना के आधार पर वहां खीरे के नकली बीजों की अवैध री-पैकिंग की जांच करने पहुंचे थे।
विभागीय टीम का आरोप, हुई मारपीट
विभागीय टीम का आरोप है कि जांच के दौरान स्थानीय व्यापारियों ने उनके साथ मारपीट की, राजकार्य में बाधा पहुंचाई और उनका अपहरण करने का प्रयास किया, जिसकी एफआईआर सदर थाने में दर्ज कराई गई। इसके विपरीत, व्यापारियों ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कृषि विभाग के कर्मचारी वैध व्यापार बंद करने की धमकी देकर 20 लाख रुपए की घूस मांग रहे थे और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
कांग्रेस ने की घेराबंदी
इस मामले में वीडियो सामने आने के बाद जहां किरोड़ी अपनी टीम के समर्थन में जुटे हैं। वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की ओर से भी कृषि विभाग की घेराबंदी की गई है। डोटासरा ने एक्स पोस्ट कर लिखा है ‘ कि मतलब जो कृषि मंत्री के साथ कार्रवाई का चेहरा बनकर घूमें, बाद में वही उगाही करें, सरकार को पूरे मामले की जांच करनी चाहिए
बेबाक मंत्री पहले भी कर चुके हैं इस्तीफे की बात
उल्लेखनीय है कि बेबाक मंत्री अपनी कार्यशैली और बयान से अक्सर चर्चा में रहता है। यह पहला अवसर नहीं है कि उन्होंने इस्तीफा दे देनी का बात कही है। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के लिए अपने सिद्धांतों के लिए पद दांव पर लगाना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि यदि उनके प्रभाव वाले क्षेत्र (दौसा, सवाई माधोपुर, भरतपुर) में भाजपा हारती है, तो वे इस्तीफा दे देंगे। परिणाम विपरीत आने पर उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अपना इस्तीफा सौंप भी दिया था, हालांकि बाद में आलाकमान की समझाइश पर वापस लिया गया।
राजनीति के जानकारों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों में भी वे आदिवासियों और युवाओं के मुद्दों पर कई बार बगावती तेवर अपनाते हुए इस्तीफा जेब में लेकर चलने वाले नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी इस ताजा चेतावनी ने सरकार और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।