Rajasthan News: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. सरकार अब सीधे निकायों की वित्तीय शक्तियां बढ़ाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग की ओर से एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद नगर पालिका अधिनियम में संशोधन कर निकायों को वित्तीय रूप से और मजबूत बनाने का फैसला लिया जाएगा.
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों पर बना सस्पेंस अब नया मोड़ ले रहा है… चुनाव टल रहे हैं, लेकिन खर्च बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है. सरकार ने 309 निकायों में बजट और वित्तीय शक्तियां बढ़ाने के लिए हाई लेवल कमेटी बना दी है…जो अपनी रिपोर्ट देगी. इस रिपोर्ट के आधार पर बजट में करीब 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है. फिलहाल चुनाव नहीं होने की वजह से ये सभी वित्तीय अधिकार अफसरों के पास हैं और प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद भी खर्च का नियंत्रण प्रशासन के ही हाथ में रहेगा. सरकार का तर्क है कि इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक पहुंचेगा.
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों को लेकर बनी अनिश्चित स्थिति के बीच राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है. प्रदेश की 309 नगरीय निकायों में आयुक्तों, अधिकारियों और महापौर-सभापतियों की वित्तीय शक्तियां बढ़ाने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है. यह समिति अपनी अनुशंसा रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर नगर पालिका अधिनियम में संशोधन संभव है. सरकार की योजना निकायों के बजट में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की है. वर्तमान में प्रदेश के निकायों का सालाना बजट 5000 से 6000 करोड़ रुपए के बीच है. इसमें से लगभग 2000 से 2500 करोड़ रुपए विकास कार्यों पर खर्च किए जाते हैं, जबकि शेष राशि वेतन, भत्ते और अन्य मदों में जाती है. प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि में भी इजाफा होने की संभावना है.
बजट में संंभावित बढ़ोतरी
1- नगर निगम
अधिकारी::::वर्तमान बजट::::संभावित बजट
आयुक्त – 1 करोड़ तक – 1.60 करोड़ तक.
अतिरिक्त आयुक्त, उपायुक्त – 25 लाख तक – 40 लाख तक.
महापौर – 2 करोड़ तक – 3 करोड़ तक.
वित्त समिति – 5 करोड़ तक – 7 से 9 करोड़ तक.
निगम बोर्ड – पूर्ण बजट.
2- नगर परिषद
अधिकारी – वर्तमान बजट – संभावित बजट
आयुक्त – 2 लाख तक – 3 लाख तक.
सभापति – 50 लाख तक – 75 से 80 लाख तक.
वित्त समिति – 1 करोड़ तक – 1.50 करोड़ तक.
बोर्ड – पूर्ण बजट.
3- नगर पालिका
अधिकारी – वर्तमान बजट – संभावित बजट
कार्यकारी अधिकारी – 1 लाख तक – 1.50 लाख तक.
चेयरमैन – 25 लाख तक – 40 लाख तक.
वित्त समिति – 50 लाख तक – 1 करोड़ तक.
बोर्ड – पूर्ण बजट.
निकाय चुनाव नहीं होने के कारण फिलहाल निकायों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार प्रशासकों और अधिकारियों के पास केंद्रित हैं. ऐसे में बजट बढ़ने का सीधा नियंत्रण भी इन्हीं के पास रहेगा. सरकार का तर्क है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आमजन को समय पर लाभ मिल सकेगा. हालांकि, जनप्रतिनिधियों के अभाव में आम नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी निकाय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. ऐसे में प्रस्तावित बदलाव को लेकर प्रशासनिक दक्षता बनाम जनभागीदारी का मुद्दा भी उठने लगा है. स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक जुईकर प्रतीक चन्द्रशेखर की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति में वित्तीय सलाहकार (सदस्य सचिव), नगर निगम जयपुर के अतिरिक्त आयुक्त, वित्तीय सलाहकार तथा विधि निदेशालय के निदेशक को शामिल किया गया है. समिति की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी.
बहरहाल,नगरीय निकाय चुनावों की अनिश्चितता के बीच सरकार अब बजट और वित्तीय शक्तियों को बढ़ाने की तैयारी में है. सवाल यह है कि जब फैसले पूरी तरह अफसरों के हाथ में होंगे, तो क्या विकास कार्यों में तेजी आएगी या जवाबदेही और कमज़ोर होगी. आने वाले दिनों में कमेटी की रिपोर्ट तय करेगी कि शहरों की तस्वीर बदलेगी या सिस्टम पर सवाल और गहराएंगे.