Rajasthan News: शुक्रवार को राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जयपुर स्थित शिक्षा संकुल में 6 मार्च को बड़ी घोषणा की है. उन्होंने शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करते हुए बताया की नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू किया जाएगा और नए बच्चों के स्वागत के लिए प्रवेशोत्सव का भी आयोजन किया जाएगा. इसके साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूलों की गुणवत्ता और छात्रों की सुरक्षा के कई पहलुओं पर चर्चा की है. इसके साथ ही प्रदेश में नए शिक्षा सत्र से पहले गर्मियों की छुट्टी के लिए तारीखों की घोषणा भी कर दी है.
राजस्थान में कब होंगी गर्मी की छुट्टियां?
राजस्थान शिक्षा विभाग ने इस वर्ष सरकारी स्कूल की गर्मियों की छुट्टियों को संख्या घटा दी है. इसका कारण बताया गया है इस वर्ष शिक्षण दिनों की संख्या को बढ़ाकर 214 दिन करना है. इस वजह से ही समर वैकेशन के दिन कम हो गए हैं. बताया गया है कि इस वर्ष बच्चों को पढ़ाई के ज्यादा दिन दिए जाएंगे जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा.
पहले कितने दिन होती थी छुट्टियां?
राजस्थान में स्कूलों की गर्मियों की छुट्टियां पहले 45 दिन हुआ करती थी. इसकी अवधि 17 मई से 30 जून तक रहती थी. मगर इस बार गर्मी की छुट्टी के दिनों को कम करके भजनलाल सरकार ने 35 दिन का कर दिया है. 2026 में स्कूल की गर्मी की छुट्टियां 16 मई से 20 जून तक रहने वाली है.
योग दिवस के चलते बदला पैटर्न
बता दें कि हर साल 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है. यह अंतर्रराष्ट्रीय योग दिवस होता है. इस दिन पर स्कूलों में समर वैकेशन की छुट्टी होती है. हालांकि, हर वर्ष इस दिन के लिए स्पेशल एडवाइजरी जारी कर स्कूल खोले जाते हैं, मगर गर्मियों की छुट्टियों के बीच सिर्फ 1 दिन के लिए स्कूल आना परेशानियों भरा होता है. इसलिए, राजस्थान सरकार ने इस वर्ष 20 जून तक ही गर्मियों की छुट्टी का ऐलान किया है.
निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध करवाने की घोषणा
राजस्थान सरकार ने बताया है कि नए सेशन की शुरुआत होने पर सभी सरकारी स्कूल के छात्र-छात्राओं को निशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध करवाई जाएंगी. वहीं, वर्दी के लिए पैसे डीबीटी के माध्यम से प्रवेशोत्सव के बाद भेजी जाएंगी. साथ ही 25 मार्च 2026, बुधवार को मेगा पीटीएम होगी तथा 27 मार्च, 6, 10 और 15 अप्रेल को प्रवेशोत्सव के तहत विशेष अभियान चलाकर बच्चों का स्कूल में स्वागत किया जाएगा.
सभी शिक्षक लेकर आएं यह शपथ
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षकों को सलाह देते हुए कहा कि सभागार में मौजूद सभी शिक्षक यह शपथ लेकर जाएं कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई सरकारी स्कूलों में ही करवाएंगे. इस बयान पर अधिकांश शिक्षक संगठनों ने शुरुआत में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. हालांकि बाद में कई शिक्षक संगठनों ने मांग उठाई कि जो भी लोग सरकारी खजाने से वेतन प्राप्त करते हैं, उन्हें अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाना अनिवार्य किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि इस नियम में केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि सभी अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल होने चाहिए.