Rajasthan Medical Store Strike: राजस्थान में बुधवार को ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में मेडिकल कारोबारियों का गुस्सा खुलकर सड़कों पर नजर आया. जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, टोंक, हिंडौन, जैसलमेर, भीलवाड़ा और कई अन्य जिलों में मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे. ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और राजस्थान केमिस्ट अलायंस के आह्वान पर प्रदेशभर के दवा विक्रेताओं ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की. इस दौरान हजारों मेडिकल दुकानों पर ताले लटके रहे, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
जैसलमेर जिले के फलसूंड कस्बे में भी ऑनलाइन फार्मेसी और ई-फार्मेसी के विरोध में दवा विक्रेताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. कस्बे सहित आसपास के इलाकों में सभी मेडिकल स्टोर बंद रहे और दवाइयों की खरीद-बिक्री पूरी तरह ठप रही. जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यनारायण गौतम ने कहा कि ऑनलाइन दवा कंपनियां बिना सही जांच-पड़ताल के दवाइयां बेच रही हैं. इससे छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और बिना डॉक्टर की पर्ची के नशीली दवाइयां मिलने का खतरा भी बढ़ गया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली दवाओं की सप्लाई की आशंका भी ज्यादा रहती है. उनका कहना है कि ई-फार्मेसी युवाओं में नशे की लत को बढ़ावा दे सकती है. दवा विक्रेताओं ने मांग की कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तुरंत सख्त कानून बनाया जाए और बिना फार्मासिस्ट वेरिफिकेशन के दवाओं की होम डिलीवरी को गैरकानूनी घोषित किया जाए. व्यापारियों ने साफ कहा कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा.
टोंक जिले में भी हड़ताल का असर साफ दिखाई दिया. जिलेभर के करीब 2000 मेडिकल स्टोर बंद रहे. मेडिकल कारोबारियों ने कहा कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर छोटे व्यापारियों को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं. उनका कहना है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री में गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीज जरूरी दवाओं के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए.
हिंडौन में भी दवा विक्रेताओं ने मेडिकल स्टोर बंद रखकर विरोध जताया. एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन कंपनियां बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयां सप्लाई कर रही हैं. उनका कहना है कि इससे प्रतिबंधित और नशीली दवाओं का गलत इस्तेमाल बढ़ सकता है. दवा विक्रेताओं ने कहा कि मेडिकल स्टोर संचालकों को जहां हर नियम का पालन करना पड़ता है, वहीं ऑनलाइन कंपनियों को खुली छूट दी जा रही है.
अजमेर, कोटा और जहाजपुर में भी मेडिकल कारोबारियों ने प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई. कोटा जिले में करीब 2 हजार मेडिकल स्टोर बंद रहे. व्यापारियों ने रैली निकालकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की. अजमेर में दवा विक्रेताओं ने जिला कलेक्टर के जरिए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. वहीं जहाजपुर में व्यापारियों ने कहा कि कोरोना काल में शुरू हुई ई-फार्मेसी व्यवस्था अब छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है.
हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों और उनके परिजनों को हुई. कई लोग जरूरी दवाओं के लिए घंटों परेशान होते रहे. हालांकि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध योजनाओं के तहत कुछ मरीजों को दवाएं मिलती रहीं, लेकिन निजी मेडिकल स्टोर बंद रहने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई. दवा विक्रेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा.