भरतपुर. डीग जिले के सीकरी थाना क्षेत्र के बूढली गांव में कुछ दिन पहले पुलिस टीम पर हुए हमले का मामला अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है. एक तरफ पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपियों की तलाश जारी है, तो दूसरी तरफ गांव के लोग पुलिस कार्रवाई के खिलाफ खुलकर सड़क पर उतर आए हैं. सोमवार को बूढली गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण डीग के लिए रवाना हुए. माहौल को देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट नजर आया और जगह-जगह बैरिकेडिंग कर इंतजाम किए गए.
गौरतलब है कि सीकरी थाना पुलिस एक वांछित आरोपी को पकड़ने के लिए बूढली गांव पहुंची थी. आरोपी के खिलाफ पहले से मामला दर्ज बताया जा रहा था. लेकिन जैसे ही पुलिस टीम गांव में पहुंची, वहां हालात अचानक बिगड़ गए. आरोपी पक्ष के लोगों ने पुलिस का विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया. पुलिस टीम पर लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया गया. इस हमले में 4 से 5 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
पुलिस पर हमले के बाद गांव में बढ़ा तनाव
पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और हालात को काबू में लिया गया. घायल पुलिसकर्मियों को भरतपुर के आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है. पुलिस ने हमलावरों की पहचान शुरू कर दी और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है. लेकिन अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गांव के लोगों का पक्ष भी सामने आ रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस पर हमले की घटना के बाद गांव में पहुंची पुलिस ने ज्यादती की. उनका कहना है कि पुलिस ने कई लोगों के साथ मारपीट की और कुछ ग्रामीणों को उठाकर अपने साथ ले गई. इसी आरोप के विरोध में ग्रामीण लामबंद हो गए हैं.
पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक भी आंदोलन में शामिल
पुलिस कार्रवाई के विरोध में शुरू हुए इस प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिलता दिखाई दिया. पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढा, पूर्व विधायक जाहिदा खान और वाजिब अली के नेतृत्व में काफिला लगातार आगे बढ़ रहा है. बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके साथ मौजूद हैं. दूसरी ओर पुलिस प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है. प्रशासन का कहना है कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी. हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए रास्तों पर बैरिकेडिंग लगाई गई है और पुलिस बल तैनात किया गया है.
दो पक्षों के दावों के बीच जांच पर टिकी नजर
फिलहाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं. पुलिस का कहना है कि उस पर हमला किया गया और सरकारी काम में बाधा पहुंचाई गई, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने बाद में गांव में पहुंचकर अनावश्यक सख्ती दिखाई. अब सबकी नजर जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है. पुलिस एक तरफ हमले के आरोपियों की तलाश कर रही है, वहीं ग्रामीण अपनी शिकायतों को लेकर प्रदर्शन पर अड़े हुए हैं. ऐसे में डीग जिले का यह मामला केवल पुलिस और ग्रामीणों के टकराव तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और लोगों के भरोसे से जुड़ा सवाल भी बनता जा रहा है.