राजस्थान में संत दादू दयाल की तपस्थली भैराणा धाम और उसके आसपास की जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. राज्य सरकार द्वारा इस इलाके को इंडस्ट्रियल एरिया के रूप में विकसित करने के फैसले के खिलाफ साधु-संतों और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है. बुधवार (27 मई) को पूरे दिन चले घटनाक्रम के बाद देर रात तक हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. आंदोलन कर रहे संतों और सांसद हनुमान बेनीवाल ने जयपुर कूच का ऐलान कर दिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया.
भैराणा धाम की जमीन अधिग्रहण के विरोध में संत समाज पिछले करीब डेढ़ महीने से आंदोलन कर रहा है. संतों की मांग है कि सरकार जमीन अधिग्रहण का फैसला वापस ले और पूरे इलाके को फिर से हरा-भरा बनाया जाए. आंदोलन कर रहे संतों का कहना है कि इस इलाके की धार्मिक और पर्यावरणीय पहचान को खत्म किया जा रहा है.
संतों के समर्थन में बुधवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी खुलकर मैदान में उतर आई. पार्टी अध्यक्ष और सांसद हनुमान बेनीवाल की अगुवाई में हजारों कार्यकर्ताओं ने भैराणा धाम में महापंचायत की. बड़ी संख्या में संत-महात्मा भी इसमें शामिल हुए.
सरकार को दिया गया अल्टीमेटम
महापंचायत के दौरान संतों और सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार को एक घंटे का अल्टीमेटम दिया. उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार ने जमीन अधिग्रहण रद्द करने को लेकर ठोस भरोसा नहीं दिया तो वे जयपुर कूच करेंगे.
इस ऐलान के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई. पहले से ही भारी पुलिस बल इलाके में तैनात था और पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया था. लेकिन हजारों लोगों के जयपुर की ओर बढ़ने की चेतावनी के बाद सरकार के अधिकारी तुरंत हरकत में आ गए.
देर रात तक चली बातचीत
राजधानी जयपुर और आसपास के जिलों से कई वरिष्ठ अधिकारी भैराणा धाम पहुंचे. देर रात तक संतों और सांसद हनुमान बेनीवाल के साथ बातचीत का दौर चला. अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से कुछ दिनों की मोहलत मांगी और भरोसा दिलाया कि उनकी बात सरकार तक पहुंचाई जाएगी.
अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे खुद भी आंदोलनकारियों का पक्ष सरकार के सामने मजबूती से रखेंगे. हालांकि अधिकारी मौके पर कोई अंतिम फैसला लेने की स्थिति में नहीं थे. इसी वजह से बातचीत पूरी तरह सफल नहीं हो सकी.
रात करीब 12 बजे के बाद बातचीत का माहौल अचानक बदल गया. संतों और आरएलपी नेताओं का कहना था कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित फैसला चाहिए. जब प्रशासन ऐसा नहीं कर पाया तो हनुमान बेनीवाल ने अपने समर्थकों के साथ जयपुर कूच शुरू करने का ऐलान कर दिया.
इसके बाद हजारों कार्यकर्ता और संत जयपुर की ओर बढ़ने लगे. मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी अपने फैसले पर अड़े रहे.
क्यों खास है भैराणा धाम
भैराणा धाम राजस्थान के जयपुर ग्रामीण और अजमेर जिले की सीमा पर स्थित है. यह संत दादू दयाल की कर्मभूमि और तपस्थली मानी जाती है. लंबे समय से यहां दादू संप्रदाय के संत साधना करते रहे हैं.
यह इलाका घने पेड़ों, हरियाली और शांत वातावरण के लिए जाना जाता रहा है. यहां बड़ी संख्या में पशु-पक्षी भी रहते थे. संतों का कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति और अध्यात्म का बड़ा केंद्र है.
कुछ समय पहले भजनलाल शर्मा सरकार ने इस इलाके को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने का फैसला लिया. सरकार ने जमीन का अधिग्रहण कर उसे रीको यानी राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन को सौंप दिया.
रीको ने करीब 550 बीघा जमीन पर औद्योगिक विकास की तैयारी शुरू कर दी. संतों का आरोप है कि इंडस्ट्री लगाने के लिए बड़ी संख्या में हरे पेड़ काटे गए और जंगल को नुकसान पहुंचाया गया.
संत समाज का कहना है कि इससे इलाके का पर्यावरण बिगड़ गया है और यहां रहने वाले पशु-पक्षी पलायन करने लगे हैं. इसी मुद्दे को लेकर संत लगातार आंदोलन कर रहे हैं.
खुले आसमान के नीचे कर रहे तपस्या
आंदोलन में शामिल कई संत भीषण गर्मी के बीच खुले आसमान के नीचे डटे हुए हैं. कई संत धूनी रमाकर अग्नि तपस्या कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे भैराणा धाम की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के खुलकर समर्थन में आने के बाद यह आंदोलन अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है. हनुमान बेनीवाल ने साफ कहा है कि अगर सरकार ने इस मामले में हीला-हवाली की तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
संतों और आरएलपी नेताओं ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ी तो वे बड़ा जनआंदोलन खड़ा करेंगे. वहीं सरकार फिलहाल स्थिति को शांत करने की कोशिश में जुटी हुई है.
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भजनलाल शर्मा सरकार इस विवाद पर क्या फैसला लेती है. साथ ही यह भी देखना होगा कि सरकार का रुख आंदोलन कर रहे संतों और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को कितना स्वीकार्य होता है.
हनुमान बेनीवाल के बयान पर भड़की भाजपा, मदन राठौड़ बोले- ऐसे नेताओं का हो सामाजिक बहिष्कार
जयपुर: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं. नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल द्वारा मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के खिलाफ की गई एक टिप्पणी के बाद प्रदेश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. बेनीवाल के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आरएलपी के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है. भाजपा के दिग्गज नेताओं ने एक सुर में बेनीवाल के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है और उन्हें राजनीतिक मर्यादा में रहने की सख्त हिदायत दी है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम, पार्टी मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा और युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष शंकर गोरा ने बेनीवाल की भाषा और राजनीतिक शैली पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है.
मदन राठौड़ का पलटवार: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि हनुमान बेनीवाल की शब्दावली का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के लिए जिस प्रकार की भाषा का उपयोग किया गया है, वह लोकतांत्रिक राजनीति में स्वीकार्य नहीं है. राठौड़ ने कहा कि राजनीतिक विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन शब्दों की मर्यादा भी होनी चाहिए. इस तरह के बयान देने वाले का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए तभी वह अपनी भाषा को संतुलित करेंगे. राठौड़ ने कहा कि जनता ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगी और समय आने पर जवाब देगी.