जयपुर. राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 15 अप्रैल 2026 से पहले चुनाव पूरे कराने की बाध्यता है, जिसके चलते मार्च-अप्रैल में मतदान होने की संभावना जताई जा रही है. प्रदेश में 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव चरणबद्ध तरीके से होंगे.
आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची अपडेट करने का कार्यक्रम जारी किया है. विधानसभा की मतदाता सूची के डेटा के आधार पर तीन स्तरों ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद पर अलग-अलग सूचियां तैयार की जाएंगी. 29 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन होगा, जबकि 31 जनवरी को वार्ड और बूथ स्तर पर इसका सार्वजनिक वाचन किया जाएगा.
24 जनवरी तक पूरा होगा मतदाता सूची का भौतिक सत्यापन
पंचायत चुनाव को लेकर राजस्थान में 7 फरवरी तक दावे-आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी और 8 से 14 फरवरी तक इनका निस्तारण होगा. अंतिम मतदाता सूची 25 फरवरी को जारी की जाएगी. इस बार 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा भी मतदाता बन सकेंगे. नए वोटर जोड़ने के लिए आवेदन लिए जाएंगे, साथ ही गलत वार्ड में दर्ज नामों का सुधार किया जाएगा. 24 जनवरी तक मतदाता सूची का भौतिक सत्यापन पूरा किया जाएगा. एक पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1100 मतदाता होंगे. ट्रांसजेंडर मतदाताओं के लिए ‘थर्ड जेंडर’ का विकल्प उपलब्ध रहेगा.
कल होगा विशेष ट्रेनिंग का आयोजन
आयोग ने 2 जनवरी को अधिकारियों की विशेष ट्रेनिंग का आयोजन भी रखा है. मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए पर्दानशीन महिलाओं की पहचान के लिए स्थानीय महिला कर्मी की मदद ली जा सकेगी. महिलाओं और दिव्यांग कर्मचारियों को पोलिंग ड्यूटी से छूट दी गई है. राज्य में ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ये चुनाव महत्वपूर्ण हैं. पिछले चुनाव 2020 में हुए थे और कई पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है. आयोग की इन तैयारियों से स्पष्ट है कि चुनाव समयबद्ध तरीके से कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है.