द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर से इतिहास रच दिया। देश की सर्वोच्च कमांडर ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (एलसीएच) ‘प्रचंड’ में बतौर को-पायलट उड़ान भरी। ऐसा करने वाली वे देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं।
द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर से इतिहास रच दिया। देश की सर्वोच्च सेनानायक ने स्वदेशी हल्के युद्धक हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में सह-पायलट के रूप में उड़ान भरी। ऐसा करने वाली वे देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में उनकी यह उड़ान सैन्य बलों के मनोबल, आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और सशक्त नेतृत्व का प्रतीक मानी जा रही है।
जैसलमेर वायुसेना स्टेशन से ऐतिहासिक उड़ान सुबह करीब 9 बजकर 15 मिनट पर राष्ट्रपति जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पहुंचीं। पायलट की वर्दी में उनका आत्मविश्वास और दृढ़ता स्पष्ट दिखाई दे रही थी। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर की तकनीकी विशेषताओं, शस्त्र प्रणालियों और उड़ान की रूपरेखा के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इसके बाद राष्ट्रपति सह-पायलट की सीट पर बैठीं और लगभग 10 बजकर 15 मिनट पर ग्रुप कैप्टन एन. एस. बहुआ के साथ हेलिकॉप्टर ने उड़ान भरी। उड़ान भरते ही रेगिस्तान का आसमान ‘प्रचंड’ की गर्जना से गूंज उठा।
सीमावर्ती इलाकों और पोकरण रेंज का हवाई निरीक्षण उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों और Pokhran Field Firing Range का हवाई निरीक्षण किया। उन्होंने कॉकपिट से सैलामी दी, जिसकी तस्वीरें देशभर में चर्चा का विषय बन गईं।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, यह उड़ान सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पोकरण क्षेत्र में शाम को वायुसेना का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ आयोजित होना है। राष्ट्रपति की उपस्थिति इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करती है।
पहले भी बना चुकी हैं कीर्तिमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इससे पहले भी सैन्य विमानों में उड़ान भर चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान Dassault Rafale में उड़ान भरी थी। इसके अतिरिक्त वे Sukhoi Su-30MKI में भी उड़ान कर चुकी हैं।
लगातार तीसरी बार सैन्य विमान में उड़ान भरकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि देश का सर्वोच्च नेतृत्व सशस्त्र बलों की तैयारियों और क्षमताओं से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
‘वायु शक्ति-2026’ में रहेंगी उपस्थित शाम को आयोजित होने वाले ‘वायु शक्ति-2026’ युद्धाभ्यास में भी राष्ट्रपति बतौर सर्वोच्च सेनानायक मौजूद रहेंगी। यह अभ्यास Indian Air Force की युद्धक क्षमता, तकनीकी दक्षता और परिचालन तैयारी का प्रदर्शन है।
सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और प्रक्षेपास्त्र प्रणालियां अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करेंगी। सीमावर्ती क्षेत्र में होने वाला यह आयोजन देश की सामरिक शक्ति का सशक्त संदेश देता है।
वायुसेना प्रमुख ने किया स्वागत जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर राष्ट्रपति का स्वागत वायुसेना प्रमुख Air Chief Marshal A. P. Singh ने किया। राष्ट्रपति ने अधिकारियों और जवानों से संवाद कर सीमाओं की सुरक्षा में उनके योगदान की सराहना की।उन्होंने कहा कि देश की रक्षा में तैनात सैनिकों का साहस, अनुशासन और समर्पण पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति का प्रतीक ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर को विशेष रूप से ऊंचाई वाले और दुर्गम क्षेत्रों में युद्ध अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसकी सटीक मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
राष्ट्रपति का सह-पायलट बनकर उड़ान भरना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सशक्त संदेश है—कि देश का नेतृत्व अपने सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। रेगिस्तान की तपती धूप में ‘प्रचंड’ की यह उड़ान भारत की सैन्य शक्ति, महिला नेतृत्व और राष्ट्रीय आत्मविश्वास की ऐतिहासिक अभिव्यक्ति बन गई है।