Rajasthan News: राजस्थान की राजधानी जयपुर के ओटीएस चौराहे पर गहलोत सरकार के समय घोषित परियोजना के तहत ही काम होगा. राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में अहम फैसला देते हुए भजनलाल सरकार द्वारा कॉन्ट्रेक्ट रद्द करने और नई डीपीआर बनाने के आदेशों को निरस्त कर दिया है. अदालत ने जेडीए को निर्देश दिए हैं कि वह पुराने अनुबंध के अनुसार तुरंत परियोजना पर काम शुरू कर समयबद्ध तरीके से पूरा करे.
‘राजनीतिक कारणों से वादों से पीछे नहीं हट सकते’
जस्टिस समीर जैन की अदालत ने यह आदेश जेसीएल इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर दिए हैं. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकार बदलने से वैध अनुबंध समाप्त नहीं किए जा सकते और राजनीतिक कारणों से सरकारी वादों से पीछे नहीं हट सकते. अदालत ने यह भी कहा कि राज्य को निष्पक्ष और तर्कसंगत तरीके से काम करना होगा तथा वह अपने संविदात्मक दायित्वों से बच नहीं सकता. इस मामले में 23 अप्रैल 2026 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा गया था.
2022 में कॉन्ट्रैक्ट हुआ, 2024 में पूरा होना था काम
बताते चलें कि गहलोत सरकार ने बजट 2021-22 में ओटीएस चौराहे को सिग्नल-फ्री बनाने की घोषणा की थी. इसके तहत जेडीए ने डीपीआर तैयार कर टेंडर जारी किए थे. जेसीएल इन्फ्रा के साथ 27 दिसंबर 2022 को अनुबंध हुआ था, जिसके अनुसार 6 जनवरी 2023 से काम शुरू कर 5 जनवरी 2024 तक पूरा करना था. परियोजना की लागत लगभग 184.30 करोड़ रुपये थी.
घोषणा के अनुसार चौराहे पर हवा में झूलता हुआ पुल, ट्रैफिक आइलैंड, गोलचक्कर चौराहे, अंडरग्राउंड आर्ट गैलरी, पेडेस्ट्रियन पाथवेज़, स्कल्पचर्स, फाउंटेन्स, एग्जिस्टिंग ड्रेनेज सिस्टम बनाने का प्लान था.
JDA के सभी आरोपों को हाई कोर्ट ने मना गलत
सरकार बदलने के बाद जेडीए ने 24 अप्रैल 2024 को कॉन्ट्रेक्ट निरस्त कर दिया और 16 दिसंबर 2024 को बैंक गारंटी भी लौटा दी. इसके बाद 3 अप्रैल 2025 को फ्लाईओवर के लिए नई डीपीआर बनाने हेतु टेंडर जारी किया गया. कंपनी ने कोर्ट में दलील दी कि कॉन्ट्रैक्ट वैध था और बिना कारण रद्द किया गया. कंपनी ने डिजाइन और ड्रॉइंग तैयार कर दी थीं तथा संसाधन भी जुटा लिए थे, लेकिन जमीन और आवश्यक अनुमतियां उपलब्ध नहीं कराई गईं. कोर्ट ने पाया कि परियोजना में देरी MNIT-OTS की आपत्तियों, साइट संबंधी समस्याओं और प्रशासनिक कारणों से हुई थी. जेडीए द्वारा कंपनी पर लगाए गए आरोपों को अदालत ने गलत बताया.
जांच कर 2 महीने में रिपोर्ट सौंपेंगे मुख्य सचिव
अदालत ने कहा कि मौजूदा अनुबंध को रद्द कर नई डीपीआर के लिए टेंडर जारी करना मनमाना और दुर्भावनापूर्ण है, जिससे केवल लागत बढ़ेगी और सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी होगी. कोर्ट ने मुख्य सचिव को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं. दो महीने में निर्णय प्रक्रिया की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है.