जयपुर। राजस्थान में एसआई भर्ती परीक्षा 2021 पेपर लीक प्रकरण की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने 50 हजार के इनामी वांटेड विनोद रेवाड उर्फ विनोद जाट की निशानदेही पर मामले में एक और आरोपी को दबोचा है। एटीएस-एसओजी के एडीजी वी.के. सिंह ने बताया कि डीग के कामां क्षेत्र के पवन कुंज निवासी रिंकू यादव को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सामने आया कि आरोपी रिंकू यादव ने परीक्षा से पहले विनोद रेवाड से एसआई भर्ती परीक्षा का सॉल्वड पेपर आठ लाख रुपए में खरीदा था। यह सौदा उसने प्रकरण में पहले गिरफ्तार हो चुके कार्तिकेय शर्मा के साथ मिलकर किया था। दोनों ने मिलकर विनोद से पेपर लेने की डील तय की और कार्तिकेय के व्हाट्सएप के जरिए पेपर प्राप्त किया।
14 सितम्बर 2021 को आयोजित इस परीक्षा में आरोपी रिंकू के हिंदी विषय में 126.1 अंक और सामान्य ज्ञान में 160.65 अंक आए। बावजूद इसके वह अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सका। एसओजी के अधिकारियों का मानना है कि पेपर खरीदने और लीक सिंडिकेट से जुड़ने के बावजूद उसका नंबर न आना, इस पूरे नेटवर्क की लालच और अव्यवस्था को उजागर करता है।
पेपर लीक प्रकरण में अब तक कई बड़े नाम सामने आ चुके हैं। दो दिन पहले ही विनोद रेवाड से पेपर लेकर थानेदार बने खींवसर के नारवांकला स्थित हनुमान नगर निवासी अशोक सिंह राजपुरोहित को गिरफ्तार किया गया था। आरोपी अशोक सिंह ने लीक पेपर की मदद से पुलिस विभाग में अपनी जगह बनाई थी।
अब तक इस मामले में 55 थानेदारों सहित कुल 125 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह संख्या यह दर्शाती है कि पेपर लीक का यह खेल सिर्फ छोटे स्तर पर नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर संगठित तरीके से चल रहा था। इस पूरे नेटवर्क ने न केवल बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया, बल्कि पुलिस जैसी संवेदनशील और जिम्मेदार सेवा में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें भी उजागर कीं।
एसओजी अधिकारियों का कहना है कि विनोद रेवाड ने लंबे समय तक फरार रहकर नेटवर्क को संचालित किया। उसके तार कई जिलों तक फैले हुए हैं। जिस तरह से आरोपी रिंकू यादव और कार्तिकेय शर्मा ने पेपर खरीदा, उससे साफ है कि यह पूरा मामला अपराध की दुनिया का एक संगठित रैकेट है, जो करोड़ों रुपए की कमाई का जरिया बना। पेपर लीक का यह खेल सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ईमानदारी से तैयारी करने वाले हजारों युवाओं के सपनों को भी रौंदा।
एसओजी की लगातार कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब पेपर लीक गैंग के किसी भी सदस्य को छोड़ा नहीं जाएगा। गिरफ़्तारियां दिखा रही हैं कि अपराध चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून का शिकंजा आखिरकार कस ही जाता है। पेपर बेचकर थानेदार बने लोग अब खुद सलाखों के पीछे हैं और जिन्हें कभी कानून व्यवस्था संभालनी थी, वे अब अपराधी की तरह जेल में सज़ा भुगत रहे हैं।
राजस्थान में हुए इस बड़े पेपर लीक प्रकरण ने भर्ती परीक्षाओं की साख पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। एसओजी की जांच आगे किन नए नामों और बड़े चेहरों को बेनकाब करेगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।