जयपुर. राजस्थान में स्लीपर बस ऑपरेटर्स की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी है. हड़ताल के चलते यात्रियों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं. जयपुर, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर और बीकानेर समेत कई जिलों में बस अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. राजस्थान रोडवेज की बसों में सीट पाने के लिए यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. कई यात्री तो पूरी रात बस अड्डों पर डटे रहे.
जयपुर के सिंधी कैंप बस अड्डे पर सोमवार सुबह से ही यात्रियों की लंबी कतारें लगी रहीं. स्लीपर बसों की हड़ताल के कारण दूर-दराज के रूटों जैसे भोपाल, आगरा, इंदौर, बड़ौदा, अहमदाबाद, लखनऊ, चंडीगढ़, अमृतसर, शिमला, मनाली, सूरत और दिल्ली जाने वाले यात्रियों को अब रोडवेज बसों का सहारा लेना पड़ रहा है.
नागौर के यात्री रविंद्र मीणा ने लोकल-18 को बताया, “हम लोग रोज स्लीपर बस से सफर करते हैं, लेकिन अब हड़ताल के चलते रोडवेज में बैठने तक की जगह नहीं मिल रही. रात से बस अड्डे पर बैठे हैं, फिर भी टिकट नहीं मिल रहा.”
किराए में बढ़ोतरी और बढ़ता बोझ
स्लीपर बसों की हड़ताल के चलते कई निजी बस संचालकों ने किराए में मनमानी बढ़ोतरी कर दी है. यात्रियों के अनुसार, जहां पहले ₹100 किराया लगता था, अब ₹200 तक देना पड़ रहा है. यह बढ़ोतरी आम यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, खासकर रोजाना सफर करने वाले कामगारों और छात्रों के लिए.
हड़ताल का असर: 10 लाख से अधिक यात्री प्रभावित
राजस्थान में लगभग 30,000 निजी और अनुबंधित बसें चलती हैं. हड़ताल के कारण अनुमानित तौर पर करीब 10 लाख यात्री रोज प्रभावित हो रहे हैं. बस ऑपरेटर्स ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने विभागीय नीतियों में बदलाव नहीं किया तो हड़ताल और लंबी चलेगी.
शादी सीजन और रेलवे पर भी असर
शादी सीजन की शुरुआत के साथ ही यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है. जयपुर से दिल्ली, जोधपुर, और उदयपुर जाने वाले यात्रियों को सीट मिलना मुश्किल हो गया है. कई परिवारों ने मजबूरी में निजी टैक्सी और ट्रेन का सहारा लिया है. बसों की हड़ताल का असर रेलवे पर भी दिख रहा है. लंबी दूरी की ट्रेनों में टिकटों की मांग बढ़ गई है और कई रूटों पर वेटिंग लिस्ट तेज़ी से बढ़ी है.
ऑपरेटर्स और लोग बोले- “जल्द सुलह होनी चाहिए”
स्लीपर बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन का कहना है कि परिवहन विभाग की नीतियां निजी संचालकों के लिए भारी पड़ रही हैं. एसोसिएशन प्रतिनिधि ने कहा, “हम सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन विभाग की मनमानी नहीं चलेगी.”
वहीं, जयपुर निवासी भावना चौधरी ने कहा, “हड़ताल से यात्रियों की हालत खराब है. स्कूल, दफ्तर और शादी समारोह तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. सरकार और ऑपरेटर्स दोनों को बैठकर हल निकालना चाहिए.” रोडवेज प्रशासन ने यात्रियों की भीड़ को देखते हुए कुछ अतिरिक्त बसें चलाई हैं, लेकिन यात्रियों का कहना है कि संख्या अभी भी कम है.