सिस्टम की मार, 2 की ले ली जान, जयपुर और कोटा की घटनाओं से सिहर उठे लोग

जयपुर: राजस्थान में सामने आए 2 दर्दनाक हादसों ने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. एक तरफ कोटा के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल (MBS Hospital) की इमरजेंसी में इलाज के कमी और लापरवाही के चलते एक महिला की जान चली गई, तो दूसरी तरफ जयपुर में टूटे बिजली के तार ने एक युवक को जिंदा जला दिया. दोनों घटनाओं में अलग-अलग विभागों की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसके बाद लोगों में गुस्सा फूट पड़ा है.

कोटा के एमबीएस अस्पताल में 55 साल की उर्मिला बाई को 108 एम्बुलेंस के जरिए गंभीर हालत में लाया गया था. एम्बुलेंस कर्मियों ने ऑक्सीजन और फ्लुइड के सहारे उन्हें करीब 75 किलोमीटर दूर से अस्पताल पहुंचाया, लेकिन आरोप है कि इमरजेंसी गेट पर मौजूद स्टाफ ने बिना आधार कार्ड के स्ट्रेचर देने से इनकार कर दिया. परिजनों और एम्बुलेंस कर्मियों को लंबे समय तक परेशान किया गया. बताया जा रहा है कि इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर भी समय पर उपलब्ध नहीं थे. मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन कोई इलाज शुरू नहीं हुआ. लगभग दो घंटे की जद्दोजहद के बाद महिला ने दम तोड़ दिया. बाद में अस्पताल प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्टाफ को फटकार लगाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

बिजली का तार टूटकर सड़क पर गिर गया
दूसरी घटना जयपुर के जयसिंहपुरा खोर इलाके की है, जहां तेज अंधड़ के कारण बिजली का तार टूटकर सड़क पर गिर गया. सिस्टम की बड़ी चूक यह रही कि न तो बिजली विभाग को समय पर अलर्ट मिला और न ही करंट ऑटोमैटिक रूप से बंद हुआ. इसी दौरान बाइक से गुजर रहे युवक यूनुस करंट की चपेट में आ गए और आग की लपटों में घिर गए. सड़क पर करंट फैलने के कारण कोई भी उन्हें बचाने के लिए आगे नहीं आ सका. बाद में पुलिस ने बिजली सप्लाई बंद करवाई और युवक को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की
दोनों घटनाओं में एक समान पैटर्न सामने आया है. लापरवाही, देरी और संवेदनहीनता. कोटा में अस्पताल का सिस्टम मरीज की जान बचाने में नाकाम रहा, जबकि जयपुर में बिजली विभाग की तकनीकी और प्रबंधन खामी ने एक जिंदगी छीन ली. स्थानीय लोगों ने दोनों मामलों में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है. ये घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि आपातकालीन सेवाओं में सुधार और जवाबदेही तय करना बहुत जरूरी है, वरना ऐसी दर्दनाक घटनाएं होती रहेंगी.