Rajasthan Budget 2026: राजस्थान की वित्तमंत्री दीया कुमारी 11 फरवरी को राजस्थान राज्य बजट 2026-27 विधानसभा में पेश करेंगी. प्रदेश के इस बजट से राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने राज्य बजट पूर्व परिचर्चा कर बजट से काफी उम्मीदें जताई. वैट पर ब्याज और पेनल्टी माफ करने की एमनेस्टी योजना, कृषि मण्डियों में भूखण्ड आवंटन की बची हुई राशि के लिए ब्याज-पेनल्टी माफ करने की योजना और स्टाम्प ड्यूटी पर ब्याज माफी योजना इस राज्य बजट से उम्मीद जताई है.
राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमेन बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि यूजर चार्ज संधारण के बाद राजस्थान की मंडियों से गैर-अधिसूचित कृषि जिंसों का व्यापार करने वाले व्यापारियों ने मंडी की दुकान छोड़कर बाहर व्यापार करना शुरू कर दिया है. मंडी चाहे प्राईमरी हो या सेकण्डरी हो, मण्डी में पशुआहार, दाल, चावल, तेल, मसाले, ड्राईफ्रूट्स आदि की उपलब्धता बनी रहनी चाहिए.
प्राईमरी मंडी में किसान अपना माल बेचकर अपनी आवश्यकता की वस्तुएं पशुआहार, दाल, चावल, तेल, मसाले, ड्राईफ्रूट्स समेत वस्तुएं खरीदकर ले जाता है. इसी प्रकार सैकण्डरी मार्केट में शहर की पूरी जनता को रियायत दामों में यह सब वस्तुएं मंडियों में ही उपलब्ध रहती है. अब ये सब बाहर बिकने लगी है और मंडियां वीरान होने लगी हैं.
वैट पर ब्याज और पेनल्टी माफ करने की एमनेस्टी योजना, कृषि मंडियों में भूखण्ड आवंटन की बची हुई राशि के लिए ब्याज पेनल्टी माफ करने की योजना और स्टाम्प ड्यूटी पर ब्याज माफी योजना लाने की उम्मीद जताई है. सभी कृषि जिंसों पर आड़त 2.25 प्रतिशत (ईसबगोल, जीरा व सौंफ को छोड़कर) होनी चाहिए.
नाम परिवर्तन पर 5 प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत की बजाये 50 पैसे सैंकड़ा लिया जाना चाहिए. किराये की बची हुई सभी दुकाने मालिकाना हक पर 25 प्रतिशत डीएलसी की दर पर आवंटित की जानी चाहिए. सभी व्यापार मण्डलों को 20 प्रतिशत डीएलसी की दर पर कार्यालय हेतु भूमि आवंटित की जानी चाहिए.
एफसीआई द्वारा समर्थन मूल्य पर सभी मंडियों में गेहूं की खरीद की जानी चाहिए. धनिये पर मण्डी टैक्स 50 पैसे सैकड़ा किया जाना चाहिए. सरसों तथा सोयाबीन की फसल बढ़ाने के लिए सरकार किसानों को बीज और बिजली पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जानी चाहिए.
राजस्थान में कार्यरत तेल मीलों, दाल मीलों, आटा मीलों और मसाला उद्योगों को सालभर तक अपने 60-70 प्रतिशत कैपसिटी पर फैक्ट्री चलाने के लिये रॉ-मैटेरियल बाहर से भी मंगाना पड़ता है. बाहर से आने वाला रॉ-मैटेरियल उस राज्य का कर चुकाना होता है.
राज्य में दोबारा मंडी सेस आदि मांगना गलत है, जिन फैक्ट्रियों में रिप्स में छूट दी गई है, उनपर भी मंडी सचिव यह दबाव डालते हैं कि आप इसी मंडी से माल खरीदें, तो ही आपको रिप्स में छूट मिलेगी. रिप्स में छूट उद्योग चलाने के लिए होती है. उद्योग रॉ-मैटेरियल प्रान्त के बाहर व प्रान्त के भीतर खरीद करता रहता है.
सभी रॉ-मैटेरियल खरीद पर रिप्स की छूट प्रभावी होनी चाहिए. आईटीसी नियमों को सरल बनाया जाएं. रिवर्सल/क्लेम/रिक्लेम प्रक्रिया आसान की जानी चाहिए. ब्याज दर 18 से घटाकर 6 प्रतिशत की जानी चाहिए. जीएसटी में 18 प्रतिशत ब्याज दर बहुत अधिक है, पेनल्टी केवल गम्भीर मामलों में लगे.
सेक्शन 73-74 का दुरुपयोग रोका जाना चाहिए. पुराने वर्षों की 1 लाख तक की वार्षिक डिमांड राइट-ऑफ किया जना चाहिए. ई-इनवॉइस में गलती सुधारने/कैंसिल करने की समय सीमा 30 दिन की जाए. ई-वे बिल की लिमिट 5 लाख रुपये तक की जाए, जनरल पेनल्टी को 5 हजार रुपये की जाए.