पेपर लीक के पैसों से 1 नहीं काट दी 3 कॉलोनियां, 8 साल में फर्श से अर्श पर पहुंचा मास्टरमाइंड मांगीलाल, जानें

जयपुर: किसी ने सच कहा है कि भ्रष्टाचार की आंच पर पकी हुई रोटी बड़ी स्वादिष्ट होती है। एक बार मुंह लग जाए, तो बार- बार खाने का मन करता है। नीट- यूजी पेपर लीक कांड के मास्टरमाइंड मांगीलाल की कहानी कुछ इसी तरह की है। मांगीलाल के बारे में जैसे- जैसे जांच एजेसियों को पता चल रहा है, अकूत संपत्ति का परत दर परत पता चल रहा है। मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल के अकूत संपत्ति वाले सम्राज्य का काला सच लोगों के सामने आने लगा है। सीबीआई की जांच में अब तक जो पता चला है, उसके मुताबिक आरोपियों ने बेहिसाब और अकूत संपत्ति बनाई है। मामला कालोनियों से जुड़ा बताया जा रहा है। मांगीलाल ने अपने बेटे के नाम से एक नहीं, बल्कि तीन कालोनियां काटी थीं।

अकूत संपत्ति का खुलासा
शुरुआत में हुई जांच के मुताबिक जो सीबीआई को इनपुट मिले हैं, उसके मुताबिक आरोपी मांगीलाल बिवाल प्रॉपर्टी के कारोबार की आड़ में नीट- यूजी पेपर लीक की काली कमाई को डाल रहा था। उस कमाई को लीगल यानी सफेद बना रहा था। उसने अपने बेटे विकास के नाम पर जमवारामगढ़ इलाके में कई जमीन के प्लॉट खरीदे थे। उसने वहां कालोनी विकसित की। उसने इनका नाम, विकास- एक और विकास- दो और विकास- तीन नाम दिया। इसके तहत इन प्लॉट को काटकर बेचा जा रहा था। सीबीआई अब इसकी विस्तार से जानकारी जुटा रही है।

फॉर्म हाउस से क्या मिला?
सीबीआई की टीम की छापेमारी में उसके पैतृक मकान और आलीशान फॉर्म हाउस से संदिग्ध कागजात मिले हैं। ये कागजात नीट- यूजी पेपर लीक से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। इसके अलावा वहां से कई परिवारों के मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और वित्तीय लेनदेन के कागजात भी मिले हैं। सीबीआई को ये लग रहा है कि कॉलोनियां काटने और जमीनें खरीदने के लिए जिस फंड का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसका संबंध नीट- यूजी पेपर लीक से है। इसका मामला आगे जाकर पेपर लीक से मिल सकता है। सीबीआई सभी पहलुओं की जांच में जुटी है।

ग्रामीण प्रगति देखकर हैरान
स्थानीय ग्रामीणों ने जो मीडिया को बयान दिया, उसके मुताबिक उनकी स्थिति हैरान होने वाली थी। उन्होंने सोचा नहीं था कि घनश्याम, मांगीलाल और दिनेश का परिवार सात आठ साल पहले बिल्कुल साधारण था। अचानक इन्हें कौन सी लॉटरी लग गई। ऐसा बदलाव आया कि पूरा गांव दंग रह गया। मामलू घर से सीधा लग्जरी फॉर्म हाउस, महंगी गाड़ी और परिवार के कई बच्चों का मेडिकल कॉलेज में नामांकन। पूरा गांव हैरान था। लोग उसकी रईसी पर रस्क करने लगे थे। लोग इस परिवार की धमक महसूस करने लगे थे। लोगों ने कहा कि इन लोगों ने काफी जमीनें खरीद लीं।

नीट-यूजी पेपर लीक का खेल!
स्थानीय लोगों के मुताबिक जब इन लोगों की अचानक बढ़ी संपत्ति पर सवाल उठने लगा, तो लोग अब ध्यान से इस परिवार की प्रगति को देखने लगे। लोगों ने बताया कि उनसे जब सवाल किया जाता, तो ये लोग बताते कि जमीन की खरीद बिक्री में अच्छा पैसा आ रहा है। उन्हें बाद ये पता चला कि ये जमीन की आड़ में काली कमाई को सफेद करने में लगे हैं। उनके खिलाफ कोई बोलता नहीं था। अब सीबीआई विकास नाम से बसाई जा रही कालोनियों के सहारे ये पता लगाने में लगी है कि क्या इसके कनेक्शन किसी सफेदपोश से तो नहीं हैं।