मकर संक्रांति के दिन एकादशी, चावल की खिचड़ी खाने पर बड़ा ‘धर्मसंकट’, पंडितजी से जानें जवाब

Makar Sankranti 2206 me Khichdi banegi ya nahin : मकर संक्रांति को साल का पहला बड़ा पर्व होता है. साथ ही यह ज्‍योतिष की दृष्टि से भी बहुत अहम होता है क्‍योंकि इसी दिन सूर्य गोचर करके मकर राशि में प्रवेश करते हैं. साथ ही सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य का उत्तरायण होना शुभ होता है. इस दिन से खरमास खत्‍म होता है और शुभ कार्य शुरू होते हैं. साथ ही मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़ और खिचड़ी खाने-दान करने का बड़ा महत्‍व है. लेकिन इस साल ना तो मकर संक्रांति से शुभ कार्य प्रारंभ हो पाएंगे और ना ही खिचड़ी खाई जा सकेगी.

मकर संक्रांति के दिन एकादशी, कैसे खाएं खिचड़ी?
मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी है और एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित होता है. ऐसे में इस साल मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाएं या नहीं, यह सवाल सभी के मन में हैं.

इस मामले में ज्‍योतिषाचार्य दिलीप गुप्‍ता के अनुसार मकर संक्रांति पर एकादशी हैं, तो जिन लोगों का व्रत है वे तिल-गुड़ का सेवन करें. क्‍योंकि एकादशी व्रत में किसी भी तरह के अनाज का सेवन नहीं किया जाता है. वहीं जिन लोगों का व्रत नहीं है और वे एकादशी पर चावल का सेवन नहीं करते हैं, उन लोगों को भी मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से बचना चाहिए. वे तिल-गुड़ का सेवन करके और दान करके भी पूरा पुण्‍य प्राप्‍त कर सकते हैं.

शाम को खत्‍म हो जाएगी एकादशी

इसे लेकर एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि जो लोग मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान और सेवन करना ही चाहते हैं वे शाम को 05:53 बजे एकादशी तिथि समाप्‍त होने के बाद ही चावल-दाल की खिचड़ी का सेवन करें. वहीं कई लोग अगले दिन खिचड़ी का सेवन कर सकते हैं.

वहीं शुक्र अस्‍त के चलते खरमास खत्‍म होने के बाद भी मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे. 10 फरवरी 2026 को शुक्र उदय के बाद ही मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे.